भूरीदिन्द्र॑स्य वी॒र्यं१॒॑ व्यख्य॑म॒भ्याय॑ति । राध॑स्ते दस्यवे वृक ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
bhūrīd indrasya vīryaṁ vy akhyam abhy āyati | rādhas te dasyave vṛka ||
पद पाठ
भूरि॑ । इत् । इन्द्र॑स्य । वी॒र्य॑म् । वि । अख्य॑म् । अ॒भि । आ । अ॒य॒ति॒ । राधः॑ । ते॒ । द॒स्य॒वे॒ । वृ॒क॒ ॥ ८.५५.१
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:55» मन्त्र:1
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:26» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:1
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सर्वत्र प्रभु शक्ति का अनुभव
पदार्थान्वयभाषाः - [१] मैं (इन्द्रस्य) = उस सर्वशक्तिमान् प्रभु के (भूरि इत्) = महान् ही वीर्यं पराक्रम को (व्यख्यम्) = विशेष रूप से देखता हूँ। सब ओर प्रभु की शक्ति का अनुभव होता है। [२] हे (दस्यवे वृक) = दास्यववृत्ति के लिए वृक के समान, अर्थात् अशुभवृत्तियों को नष्ट करनेवाले प्रभो ! (ते राध:) = आपका ऐश्वर्य (अभ्यायति) = हमें आभिमुख्येन प्राप्त होता है। जब एक साधक सर्वत्र उस प्रभु की शक्ति का अनुभव करता है, तो अशुभवृत्तियों से ऊपर उठकर शुभ ऐश्वर्य को पाता ही है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम सर्वत्र प्रभु की शक्ति को देखने का प्रयत्न करें। प्रभु हमारी अशुभ वृत्तियों को दूर करेंगे और शुभ ऐश्वर्य को प्राप्त कराएँगे।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Let me describe in detail the heroic power of Indra. O destroyer of the violent and wicked, your strength and competence against the destroyer shines all round, that’s your bounty and grandeur.
