वांछित मन्त्र चुनें

तु॒र॒ण्यवो॒ मधु॑मन्तं घृत॒श्चुतं॒ विप्रा॑सो अ॒र्कमा॑नृचुः । अ॒स्मे र॒यिः प॑प्रथे॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ऽस्मे सु॑वा॒नास॒ इन्द॑वः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

turaṇyavo madhumantaṁ ghṛtaścutaṁ viprāso arkam ānṛcuḥ | asme rayiḥ paprathe vṛṣṇyaṁ śavo sme suvānāsa indavaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तु॒र॒ण्यवः॑ । मधु॑ऽमन्तम् । घृ॒त॒ऽश्चुत॑म् । विप्रा॑सः । अ॒र्कम् । आ॒नृ॒चुः॒ । अ॒स्मे इति॑ । र॒यिः । प॒प्र॒थे॒ । वृष्ण्य॑म् । शवः॑ । अ॒स्मे इति॑ । सु॒वा॒नासः॑ । इन्द॑वः ॥ ८.५१.१०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:51» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:19» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:10


0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'मधुमान् घृतश्चुत् व अर्क' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (तुरण्यवः) = क्षिप्रकारी कर्मकुशल (विप्रासः) = अपना विशेष रूप से पूरण करनेवाले लोग (मधुमन्तं) = अत्यन्त माधुर्यवाले (घृतश्चुतं) = दीप्ति को हमारे जीवनों में आसिक्त करनेवाले (अर्कम्) = पूजनीय प्रभु का (आनृचुः) = अर्चन करते हैं। [२] इस प्रभु के अर्चन से (अस्मे) = हमारे लिए (रयिः पप्रथे) = ऐश्वर्य का विस्तार होता है। (वृष्ण्यं शवः) = हमें सुखों का सेचन करनेवाला बल प्राप्त होता है । (अस्मे) = हमारे लिए (सुवानासः) = उत्पन्न होते हुए सोमकण (इन्दवः) = शक्तिशाली बनानेवाले होते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु का अर्चन करें। हमें ऐश्वर्य व शक्ति प्राप्त होगी। हमारे अन्दर सुरक्षित सोमकण हमें तेजस्वी व ओजस्वी बनाएँगे। प्रभु की उपासना जीवन को मधुर व ज्ञानदीप्त बनाती है | इस मन्त्र में वृणत 'तुरण्यु' पुरुष ही ' आयु' [इ गतौ] है, समझदार होने से ये 'काण्व' हैं' । यह आयु काण्व' अगले सूक्त का ऋषि है। यह इन्द्र का उपासन करता हुआ कहता है कि-
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Dynamic scholars and vibrant sages offer to Indra the song of adoration replete with honey sweets and liquid power of exhortation. Let the beauty and prosperity of life increase among us, let generous and virile strength and vitality grow, and let streams of inspiring soma flow.