वांछित मन्त्र चुनें

ए॒ताव॑तस्ते वसो वि॒द्याम॑ शूर॒ नव्य॑सः । यथा॒ प्राव॒ एत॑शं॒ कृत्व्ये॒ धने॒ यथा॒ वशं॒ दश॑व्रजे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

etāvatas te vaso vidyāma śūra navyasaḥ | yathā prāva etaśaṁ kṛtvye dhane yathā vaśaṁ daśavraje ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ए॒ताव॑तः । ते॒ । व॒सो॒ इति॑ । वि॒द्याम॑ । शू॒र॒ । नव्य॑सः । यथा॑ । प्र । आवः॑ । एत॑शम् । कृत्व्ये॑ । धने॑ । यथा॑ । वश॑म् । दश॑ऽव्रजे ॥ ८.५०.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:50» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:17» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:9


0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'एतश व वश' का रक्षण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शूर) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले ! (वसो) = हमारे निवास को उत्तम बनानेवाले ! (नव्यसः ते) = स्तुति के योग्य आपके (एतावतः) = इतने ऐश्वर्य को विद्याम प्राप्त करें। [२] (यथा) = जिस प्रकार आप (कृत्व्ये धने) = पुरुषार्थ से करने योग्य धन के होने पर (एतशं) = इस दीप्त व पवित्र पुरुष को (प्रावः) = रक्षित करते हैं और (यथा) = जैसे (दशव्रजे) = दसों इन्द्रियों को संयम के बाड़े में रोकने पर (वशं) = इस वशी- जितेन्द्रिय-पुरुष को आप रक्षित करते हैं। हमें भी आप इस एतश और वश की तरह रक्षित करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम पुरुषार्थ से धनार्जन करते हुए पवित्र व दीप्त जीवनवाले बनें। दसों इन्द्रियों को संयम बाड़े में निरुद्ध करके वशी बनें। इस प्रकार हम प्रभु द्वारा रक्षा के पात्र हों।
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord omnipotent, shelter home of the universe, adorable and worshipped, thus do we know you, thus do we celebrate your glory, as you protect the man of action and advancement when the battle of existence begins for him, and as you promote the man of self control to seek fulfilment of his mind and senses while his life lasts in the human body.