वांछित मन्त्र चुनें

तेन॑ नो वाजिनीवसू परा॒वत॑श्चि॒दा ग॑तम् । उपे॒मां सु॑ष्टु॒तिं मम॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tena no vājinīvasū parāvataś cid ā gatam | upemāṁ suṣṭutim mama ||

पद पाठ

तेन॑ । नः॒ । वा॒जि॒नी॒व॒सू॒ इति॑ वाजिनीऽवसू । प॒रा॒ऽवतः॑ । चि॒त् । आ । ग॒त॒म् । उप॑ । इ॒माम् । सु॒ऽस्तु॒तिम् । मम॑ ॥ ८.५.३०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:5» मन्त्र:30 | अष्टक:5» अध्याय:8» वर्ग:6» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:1» मन्त्र:30


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

राजकर्त्तव्य कहते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (वाजिनीवसू) बुद्धि, विद्या, यागक्रिया, वाणिज्या और अन्नादिकों का नाम वाजिनी है। वसु=धन। हे विद्यादिधन राजन् तथा मन्त्रिमण्डल ! (तेन) उस सुवर्णनिर्मित रथ से (नः) हम प्रजाओं के निकट (परावतः+चित्) अति दूरदेश से भी (आगतम्) आवें और (मम) मेरी (इमाम्) इस (सुष्टुतिम्) शोभन स्तुति को (उप) समीप में आकर सुनें ॥३०॥
भावार्थभाषाः - सदा प्रजाओं की प्रार्थनाओं को राजा सुने ॥३०॥
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वाजिनीवसू) हे बलयुक्त धनवाले ! (तेन) तिस रथ द्वारा (नः) हमारे समीप (परावतश्चित्) दूरदेश से (आगतम्) आइये (इमाम्, मम, सुष्टुतिम्) इस मेरी सुस्तुति का (उप) उपश्रवण करें ॥३०॥
भावार्थभाषाः - हे बलसम्पन्न ऐश्वर्य्यशालिन् ! आप कृपा करके उक्त सुवर्णमय रथ द्वारा देशान्तर से हमारे यज्ञ में सम्मिलित हों, हमारी इस प्रार्थना को अवश्य श्रवण करें ॥३०॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभु स्मरण के साथ प्राणायाम

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वाजिनीवसू) = शक्तिरूप धनोंवाले प्राणापानो! (तेन) = गत मन्त्र में वर्णित उस (हिरण्यय) = रथ के हेतु से (परावतः चित्) = सुदूर देश से भी (नः आगतम्) = हमें प्राप्त होवो । अर्थात् हम किन्हीं भी सांसारिक कार्यों में कितने भी उलझे हों, प्राणायाम [प्राणसाधना] को कभी उपेक्षित न करें। सब कार्यों को छोड़कर भी समय पर प्राणसाधना अवश्य करें। [२] हे प्राणापानो! आप (मम) = मेरी (इमाम्) = इस (सुष्टुतिम्) = उत्तम स्तुति को (उप) = समीपता से प्राप्त होवो। मैं प्राणसाधना करता हुआ प्रभु का स्तवन करूँ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रतिदिन अन्य कार्यों में उलझे हुए होने पर भी प्राणसाधना अवश्य करें। प्राणायाम करते हुए प्रभु का स्मरण भी करें।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

राजकर्त्तव्यतामाह।

पदार्थान्वयभाषाः - हे वाजिनीवसू=बुद्धिधनौ राजानौ ! युवाम्। तेन=हिरण्यनिर्मितेन रथेन। परावतश्चित्= अतिदूरदेशादपि। नोऽस्मान् प्रजाः। आगतमागच्छतम्। तथा मम। इमाम्। सुष्टुतिम्=शोभनां प्रार्थनाञ्च। उपसमीपमागत्य शृणुतम् ॥३०॥
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वाजिनीवसू) हे बलयुक्तधनवन्तौ ! (तेन) तेन रथेन (नः) अस्मान् (परावतश्चित्) दूरदेशात् (आगतम्) आगच्छतम् (इमाम्, मम, सुष्टुतिम्) इमां मदीयां स्तुतिम् (उप) उपशृणुतम् ॥३०॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O winners of wealth and victory, by that golden chariot come from far, from the farthest wherever you be, and accept this holy song of mine in praise of you.