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ताभि॒रा या॑तमू॒तिभि॒र्नव्य॑सीभिः सुश॒स्तिभि॑: । यद्वां॑ वृषण्वसू हु॒वे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tābhir ā yātam ūtibhir navyasībhiḥ suśastibhiḥ | yad vāṁ vṛṣaṇvasū huve ||

पद पाठ

ताभिः॑ । आ । या॒त॒म् । ऊ॒तिऽभिः॑ । नव्य॑सीभिः । सु॒श॒स्तिऽभिः॑ । यत् । वा॒म् । वृ॒ष॒ण्व॒सू॒ इति॑ वृषण्ऽवसू । हु॒वे ॥ ८.५.२४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:5» मन्त्र:24 | अष्टक:5» अध्याय:8» वर्ग:5» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:1» मन्त्र:24


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शिव शंकर शर्मा

पुनः उसी अर्थ को कहते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (वृषण्वसू) हे धनों की वर्षा करनेवाले परमोदार राजन् तथा हे मन्त्रिमण्डल ! (यद्) जब-२ मैं (वाम्) आपको (हुवे) बुलाऊँ और इसी प्रकार अन्यान्य प्रजाएँ आपको बुलावें तब-२ (नव्यसीभिः) नवीन-नवीन (सुशस्तिभिः) और प्रशस्त (ताभिः) उन (ऊतिभिः) रक्षाओं=उपायों के साथ (आयातम्) आवें ॥२४॥
भावार्थभाषाः - प्रजाओं की प्रार्थना सुनने के लिये सदा राज्यकर्मचारिवर्ग तैयार रहे ॥२४॥
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वृषणवसू) हे धनों की वर्षा करनेवाले ! (ताभिः, नव्यसीभिः) नित्य नूतन (सुशस्तिभिः) सुप्रशंसनीय (ऊतिभिः) रक्षाओं सहित (आयातं) आवें (यत्) जब-जब (वां) आपका (हुवे) आह्वान करें ॥२४॥
भावार्थभाषाः - हे ज्ञानयोगिन् तथा कर्मयोगिन् ! आप अधिकारी पुरुषों को धन देनेवाले, प्रशंसनीय तथा सबकी कामनाओं को पूर्ण करनेवाले हैं। हे भगवन् ! हम लोग जब आपको आह्वान करें, तब आप शीघ्र आकर हमारी रक्षा करें, ताकि हमारे यज्ञादि कार्य्य निर्विघ्न पूर्ण हों ॥२४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

ऊतिभिः-सुशस्तिभिः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वृषण्वसू) = शक्ति का सेचन करनेवाले, धनोंवाले प्राणापानो! (यद् वां हुवे) = जब मैं आपको पुकारूँ तो आप (ताभिः) = उन (नव्यसीभिः) = अतिशयेन स्तुत्य [नु स्तुतौ] (ऊतिभिः) = रक्षणों के साथ (आयातम्) = हमें प्राप्त होवो। आप से रक्षित हुए हुए हम किन्हीं भी रोगों व वासनाओं से आक्रान्त न हों। [२] हे प्राणापानो! हमारा रक्षण करते हुए आप (सुशस्तिभिः) = प्रशस्त स्थितियों के साथ हमें प्राप्त होवो। प्राणसाधना द्वारा हम सदा प्रशस्त कर्मों को ही करनेवाले बनें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना हमारे जीवनों में शक्तिशाली वसुओं को [धनों को] प्राप्त कराये। हमारा रोगों व वासनाओं के आक्रमण से रक्षण करे। हमारे जीवनों को प्रशस्त बनाये।
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शिव शंकर शर्मा

पुनस्तमर्थमाचष्टे।

पदार्थान्वयभाषाः - हे वृषण्वसू ! वर्षणानि=वर्षाकारीणि वसूनि धनानि ययोस्तौ=परमोदारौ हे राजानौ ! यद्=यदा-२। वाम्=युवाम्। हुवे=आह्वयामि। अन्ये च आह्वयन्ति। तदा-२। युवाम्। नव्यसीभिः=नव्यतराभिः। सुशस्तिभिः=प्रशस्ताभिः। ताभिः=प्रसिद्धाभिः। ऊतिभी रक्षाभिरुपायैः। आयातमागच्छतम् ॥२४॥
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वृषणवसू) हे वर्षणीयधनौ ! युवां (ताभिः, नव्यसीभिः) ताभिर्नूतनाभिः (सुशस्तिभिः) सुप्रशस्याभिः (ऊतिभिः) रक्षाभिः (आयातं) आगच्छतं (यत्) यदा (वां) युवां (हुवे) आह्वयामि ॥२४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O generous lords of wealth and power, come to us with those most modern and most admirable means and methods of protection whenever we call upon you.