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अ॒स्माक॑म॒द्य वा॑म॒यं स्तोमो॒ वाहि॑ष्ठो॒ अन्त॑मः । यु॒वाभ्यां॑ भूत्वश्विना ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asmākam adya vām ayaṁ stomo vāhiṣṭho antamaḥ | yuvābhyām bhūtv aśvinā ||

पद पाठ

अस्माक॑म् । अ॒द्य । वा॒म् । अ॒यम् । स्तोमः॑ । वाहि॑ष्ठः । अन्त॑मः । यु॒वाभ्या॑म् । भू॒तु॒ । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.५.१८

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:5» मन्त्र:18 | अष्टक:5» अध्याय:8» वर्ग:4» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:1» मन्त्र:18


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शिव शंकर शर्मा

राजवर्ग को अपनी-२ प्रार्थना सुनावे, यह इससे दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे अश्वादिबलयुक्त राजा तथा सभाध्यक्ष ! (अद्य) आज (अयम्) यह (अस्माकम्+स्तोमः) हम लोगों की स्तुति प्रार्थना (वाम्) आप दोनों को (वाहिष्ठः) अतिशय प्रसन्न करनेवाली (युवाभ्याम्) और आपके (अन्तमः+भूतु) अतिशय समीपवर्ती हो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - सत्य और हृदयग्राही स्तुति प्रार्थना राजवर्ग को सुनावें ॥१८॥
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे ओजस्विन् ! (अद्य) आज (अस्माकं) हमारा (अयं, वां, स्तोमः) यह आपके लिये किया गया स्तोत्र (युवाभ्यां) आपको (वाहिष्ठः) अवश्य प्राप्त करानेवाला और (अन्तमः) समीप में होनेवाला (भूतु) हो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे ज्ञानयोगिन् तथा कर्मयोगिन् ! आज हम लोग जिस स्तोत्र द्वारा आपकी स्तुति करते हैं, वह हमारे लिये सफलीभूत हो अर्थात् हम लोग आपके शुभाचरणों का अनुकरण करके पराक्रमी, उद्योगी तथा विद्वान् होकर आपके समीपवर्ती हों ॥१८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वाहिष्ठः [स्तोमः]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! (अद्य) = आज (अस्माकम्) = हमारा (अयम्) = यह (याम्) = आपके लिये किया गया (स्तोमः) = स्तुति समूह (युवाभ्यां अन्तमः भूतु) = आपके लिये अन्तिकतम हो, अत्यन्त प्रिय हो । अर्थात् हमें यह आपकी स्तुति आपके प्रति रुचिवाला बनाये, हम प्राणसाधना की प्रवृत्तिवाले हों। [२] यह स्तोम (वाहिष्ठः) = हमें अधिक-से-अधिक लक्ष्य के समीप पहुँचानेवाला हो। वस्तुतः प्राणसाधना ही चित्तवृत्ति की एकाग्रता का साधन बनकर हमें प्रभु-दर्शन कराती है। यह प्रभु-दर्शन ही अन्तिम लक्ष्य है, यहाँ हमें यह प्राणों का स्तवन पहुँचानेवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्राणापान का स्तवन करते हुए प्राणसाधना में प्रवृत्त हों। यह साधना ही हमें लक्ष्य- स्थान पर पहुँचायेगी।
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शिव शंकर शर्मा

राजवर्गं स्वस्वप्रार्थनां श्रावयेदिति दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विना=अश्विनौ राजानौ। अद्यास्मिन् दिवसे। अयमस्माकं स्तोमः=प्रार्थना। वाम्=युवयोः। वाहिष्ठः=वाहयितृतमः प्रसादयितृतमः सन्। युवाभ्यां युवयोरन्तमोऽन्तिकतमोऽतिशयसमीपवर्ती। भूतु=भवतु ॥१८॥
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे ओजस्विनौ ! (अद्य) इदानीं (अस्माकं) अस्मदीयं (अयं) एषः (वां, स्तोमः) युवयोः स्तोत्रं (युवाभ्यां) त्वदर्थं (वाहिष्ठः) अतिशयेन प्रापकं (अन्तमः) अन्तिकतमं च (भूतु) भवतु ॥१८॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, may this song of our invocation, adoration and yajnic prayer be most touching for you at heart and impel you to respond and come.