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यथा॒ कण्वे॑ मघवन्त्र॒सद॑स्यवि॒ यथा॑ प॒क्थे दश॑व्रजे । यथा॒ गोश॑र्ये॒ अस॑नोॠ॒जिश्व॒नीन्द्र॒ गोम॒द्धिर॑ण्यवत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yathā kaṇve maghavan trasadasyavi yathā pakthe daśavraje | yathā gośarye asanor ṛjiśvanīndra gomad dhiraṇyavat ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यथा॑ । कण्वे॑ । म॒घ॒ऽव॒न् । त्र॒सद॑स्यवि । यथा॑ । प॒क्थे । दश॑ऽव्रजे । यथा॑ । गोऽश॑र्ये । अस॑नोः । ऋ॒जिश्व॑नि । इन्द्र॑ । गोऽम॑त् । हिर॑ण्यऽवत् ॥ ८.४९.१०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:49» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:15» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:10


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

त्रसदस्यु कण्व, दशव्रज पक्थ, ऋजिश्वा गोशर्ये

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (मघवन्) = परमैश्वर्यशालिन् (इन्द्र) = शत्रुविद्रावक प्रभो! आप मेरे लिए (गोमद्) = प्रशस्त इन्द्रियों व प्रशस्त ज्ञान की वाणियों वाले तथा (हिरण्यवत्) = [हिरण्यं वै वीर्यम्] प्रशस्त शक्तिवाले धन को (असनोः) = देते हैं। उसी प्रकार मेरे लिए धन को देते हैं, (यथा) = जैसे (त्रसदस्यवि) = दास्यव वृत्तियों को अपने से भयभीत कर दूर भगानेवाले (कण्वे) = बुद्धिमान् पुरुष में इस धन को प्राप्त कराते हैं। (यथा) = जैसे दशव्रजे दसों इन्द्रियों को संयम के बाड़े में निरुद्ध करनेवाले पक्थे परिपक्व बुद्धिवाले व तप:पक्व पुरुष में इस धन को देते हैं। [२] (यथा) = जैसे (ऋजिश्वनि) = ऋजु [सरल] मार्ग से गति करनेवाले (गोशर्ये) = इन्द्रिय दोषों के हिंसन में उत्तम पुरुष में आप इस धन को देते हैं। मुझे भी इस प्रशस्त ज्ञान की वाणियोंवाले व प्रशस्त शक्तिवाले धन को दीजिए ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम ' त्रसदस्यु कण्व बनें। दशव्रज पक्थ, व ऋजिश्वा गोशर्य' बनें। प्रभु हमें प्रशस्त ज्ञानवाले व प्रशस्त शक्तिवाले धन को देंगे। 'गोमत् हिरण्यवत्' शक्तियों से प्रतिपादित धन को प्राप्त करके यह 'पुष्टिगु' बनता है। मेधावी ' काण्व' तो है ही इसी का अगला सूक्त है-
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of glory, we pray for that generosity of yours by which you award the wealth of lands and cows, sense, mind and wisdom, and the golden excellence of honour and culture, to the wise celebrant, the opponent of violence and terror, the veteran scholar, the controller of sense and mind in meditation, the energiser of perception and intelligence, and the man of simple and straight paths of truth and rectitude.