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व्य१॒॑स्मे अधि॒ शर्म॒ तत्प॒क्षा वयो॒ न य॑न्तन । विश्वा॑नि विश्ववेदसो वरू॒थ्या॑ मनामहेऽने॒हसो॑ व ऊ॒तय॑: सु॒तयो॑ व ऊ॒तय॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vy asme adhi śarma tat pakṣā vayo na yantana | viśvāni viśvavedaso varūthyā manāmahe nehaso va ūtayaḥ suūtayo va ūtayaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

वि । अ॒स्मे इति॑ । अधि॑ । शर्म॑ । तत् । प॒क्षा । वयः॑ । न । य॒न्त॒न॒ । विश्वा॑नि । वि॒श्व॒ऽवे॒द॒सः॒ । व॒रू॒थ्या॑ । म॒ना॒म॒हे॒ । अ॒ने॒हसः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ । सु॒ऽऊ॒तयः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ ॥ ८.४७.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:47» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:7» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वरूथ्य धनों की प्राप्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे देवो ! (अस्मे) = हमारे लिए (तत् शर्म) = उस शरण को (अधिवियन्तन) = आधिक्येन प्राप्त कराओ, (न) = जैसे (वयः) = पक्षी (पक्षा) = अपने पंखों को बच्चों के रक्षण के लिए प्राप्त कराते हैं। [२] हे (विश्ववेदसः) = सम्पूर्ण धनोंवालो देवो! आपसे (विश्वानि) = सब (वरूध्यानि) = गृहोचित धनों को (मनामहे) = माँगते हैं। (वः) = आपके (ऊतयः) = रक्षण (अनेहसः) = निष्पाप हैं-हमारे जीवनों को पापशून्य बनानेवाले हैं। (वः) = आपके रक्षण (सु ऊतयः) = उत्तम रक्षण हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - मित्र, वरुण आदि दिव्यभाव हमें गृहोचित सब उत्तम धनों को प्राप्त करानेवाले हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - All round, all over us, spread your cover of protection like birds. You know and command the wealth and powers of the world. We pray for shelter, peace and protection. Sinless are your protections, free from evil, noble and holy are your protections, free from jealousy, anger and violence.