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वि॒दा दे॑वा अ॒घाना॒मादि॑त्यासो अ॒पाकृ॑तिम् । प॒क्षा वयो॒ यथो॒परि॒ व्य१॒॑स्मे शर्म॑ यच्छताने॒हसो॑ व ऊ॒तय॑: सु॒तयो॑ व ऊ॒तय॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vidā devā aghānām ādityāso apākṛtim | pakṣā vayo yathopari vy asme śarma yacchatānehaso va ūtayaḥ suūtayo va ūtayaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

वि॒द । दे॒वाः॒ । अ॒घाना॑म् । आदि॑त्यासः । अ॒प॒ऽआकृ॑तिम् । प॒क्षा । वयः॑ । यथा॑ । उ॒परि॑ । वि । अ॒स्मे इति॑ । शर्म॑ । य॒च्छ॒त॒ । अ॒ने॒हसः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ । सु॒ऽऊ॒तयः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ ॥ ८.४७.२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:47» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:7» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:2


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

पक्षा वयो यथोपरि

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (आदित्यासः) = सब अच्छाइयों का आदान करनेवाले (देवा:) = देवो ! दिव्यभावो ! आप (अघानां) = पापों के (अपाकृतिम्) = दूरीकरण को (विद) = जानते हो, अर्थात् आप सब अशुभ वृत्तियों को हमारे से दूर करते हो। [२] (यथा) = जैसे (वयः) = पक्षी (पक्षा) = पंखों को अपने बच्चों के (उपरि) = ऊपर उनके रक्षण के लिए करते हैं, इसी प्रकार आप (अस्मे) = हमारे लिए (शर्म) = शरण को (वियच्छत) = विशेष रूप से दो। (वः) = आपके (ऊतयः) = रक्षण (अनेहसः) = निष्पाप हैं। (वः) = आपके (ऊतयः) = रक्षण (सु ऊतयः) = उत्तम रक्षण है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-मित्र वरुण आदि आदित्य देवों का रक्षण हमारे जीवनों को निष्पाप बनाता है। हमारा उत्तम रक्षण करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O divine powers of light, love and justice, you know how to remove sin and cleanse us of evil. As birds shade their young ones with wings, so give us shelter and protection all over. Sinless are your protections, noble and holy are your protections.