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सु॒नी॒थो घा॒ स मर्त्यो॒ यं म॒रुतो॒ यम॑र्य॒मा । मि॒त्रः पान्त्य॒द्रुह॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sunītho ghā sa martyo yam maruto yam aryamā | mitraḥ pānty adruhaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सु॒ऽनी॒थः । घ॒ । सः । मर्त्यः॑ । यम् । म॒रुतः॑ । यम् । अ॒र्य॒मा । मि॒त्रः । पान्ति॑ । अ॒द्रुहः॑ ॥ ८.४६.४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:46» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:1» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:4


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (पुरूवसो) हे भूरिधन हे निखिल सम्पत्तिसंयुक्त (प्रणेतः) हे निखिल विधियों तथा सम्पूर्ण भुवनों के विधाता (हरीणाम्+स्थातः) परस्पर हरणशील भुवनों के अधिष्ठाता (इन्द्र) हे परमैश्वर्य्यशालिन् महेश्वर ! (त्वावतः) तेरे ही उपासक (वयम्+स्मसि) हम मनुष्य हैं, अतः हमारी रक्षा और कल्याण जिससे हो, सो करें ॥१॥
भावार्थभाषाः - परमेश्वर ही सर्वविधाता सर्वकर्त्ता है। उसी के सेवक हम मनुष्य हैं, अतः उसी की उपासना स्तुति और प्रार्थना हम करें ॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सुनीथः [मर्त्यः]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सः मर्त्यः) = वह मनुष्य (घा) = निश्चय से (सुनीथः) = उत्तम यज्ञोंवाला या उत्तम मार्गवाला होता है, (यं) = जिसको (मरुतः) = प्राण (पान्ति) = रक्षित करते हैं, अर्थात् प्राणसाधना करता हुआ जो मनुष्य अपने अन्दर शक्ति की उर्ध्व गतिवाला होता है, वह निश्चय से अपना रक्षण कर पाता है-उसका शरीर नीरोग बन जाता है। [२] वह मनुष्य जीवन में उत्तम प्रणयन [मार्ग] वाला होता है (यम्) = जिसको (अर्यमा) = [अरीन् यच्छति ] संयम की देवता तथा (मित्रः) = स्नेह की देवता तथा [वरुण:] निर्देषता का भाव (अद्रुहः) = सब प्रकार के द्रोह से रहित हुए हुए [पान्ति = ] रक्षित करते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-रोगों व वासनाओं से रक्षण का मार्ग यही है कि हम प्राणसाधना में प्रवृत्त हों तथा स्नेह, संयम व निर्देषता का पोषण करने के लिए यत्नशील हों।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे पुरूवसो=भूरिधन सर्वसम्पत्तिमन् ! हे प्रणेतः=निखिलविधीनां संपूर्णभुवनानाञ्च विधातः। हे हरीणां स्थातः=हरणशीलानां भुवनानाम् अधिष्ठातः। हे इन्द्र ! परमैश्वर्य्यसंयुक्त महेश ! त्वावतः=त्वत्सदृशस्य तवैवेत्यर्थः। उपासकाः। वयं स्मसि=वयं स्मः। तस्मादस्मान् रक्षेति शेषः ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - True it is that that man is morally right, well guided and secure whom the Maruts, vibrant powers of defence and protection, Aryama, power of right conduct and justice, and Mitra, power of love and enlightenment, all free from hate and jealousy, lead and protect on the right path.