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गावो॒ न यू॒थमुप॑ यन्ति॒ वध्र॑य॒ उप॒ मा य॑न्ति॒ वध्र॑यः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

gāvo na yūtham upa yanti vadhraya upa mā yanti vadhrayaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

गावः॑ । न । यू॒थम् । उप॑ । य॒न्ति॒ । वध्र॑यः । उप॑ । मा॒ । य॒न्ति॒ । वध्र॑यः ॥ ८.४६.३०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:46» मन्त्र:30 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:6» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:30


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभु के समीप

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (न) = जिस प्रकार (गावः) = गौवें, अपने रक्षण के लिए (यूथम्) = गोसमूह को प्राप्त होती हैं। अलग न घूमकर झुण्ड में ही आ जाती है, उसी प्रकार (वध्र्यः) = अपने को व्रतों की रज्जु में बाँधनेवाले संयमी लोग (उपयन्ति) = अपने रक्षणों के लिए प्रभु के समीप प्राप्त होते हैं। [२] प्रभु कहते हैं कि ये (वध्र्यः) = संयमी पुरुष (मा उपयन्ति) = मुझे समीपता से प्राप्त होते हैं। प्रभु सामीप्य में ही ये अपने को सुरक्षित अनुभव करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम व्रतों के बन्धनों में अपने को बाँधते हुए अपने रक्षण के लिए प्रभु के इस प्रकार समीप हों, जैसे गौवें झुण्ड के समीप ।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - As cows join the herd for protection and support so the weaker people come to me for sustenance and support, yes the needy come for succour and support.