दश॑ श्या॒वा ऋ॒धद्र॑यो वी॒तवा॑रास आ॒शव॑: । म॒थ्रा ने॒मिं नि वा॑वृतुः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
daśa śyāvā ṛdhadrayo vītavārāsa āśavaḥ | mathrā nemiṁ ni vāvṛtuḥ ||
पद पाठ
दश॑ । श्या॒वाः । ऋ॒धत्ऽर॑यः । वी॒तऽवा॑रासः । आ॒शवः॑ । म॒थ्राः । ने॒मिम् । नि । व॒वृ॒तुः॒ ॥ ८.४६.२३
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:46» मन्त्र:23
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:5» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:23
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (सनितः) हे दाता (सुसनितः) हे परमदाता (उग्र) हे उग्र (चित्र) हे चित्र आश्चर्य्य (चेतिष्ठ) हे चितानेवाले ज्ञानविज्ञानप्रद (सूनृत) सत्यस्वरूप (प्रसहा) हे विघ्नविनाशक शत्रुनिवारक (सम्राट्) हे महाराज ! तू (सहुरिम्) सहनशील (सहन्तम्) दुःखनिवारक (भुज्युम्) भोग्योचित (पूर्व्यम्) पुरातन पूर्ण धन दे ॥२०॥
भावार्थभाषाः - उपासकों के हृदय में ईश्वरीय गुण प्रविष्ट हों, अतः नाना विशेषणों द्वारा वर्णन होता है ॥२०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
रथ के दस घोड़े
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (दश) = दस (श्यावा:) = गतिशील इन्द्रियाश्व (नेमिं) = रथचक्र को (निवावृतुः) = निश्चय से परिवृतत करते हैं-आगे और आगे ले चलते हैं। शरीर ही रथ हैं, इन्द्रियाँ इस रथ के घोड़े हैं। ये दस घोड़े इस रथ में जुते हैं। ये ही इसे उन्नति के मार्ग पर आगे और आगे ले चलनेवाले हैं। [२] ये इन्द्रियाश्व (ऋद्रयः) = बढ़े हुए वेगवाले हैं। (वीतवारासः) = ये प्राप्त वरणीय शक्तिवाले हैं। (आशवः) = शीघ्रता से मार्ग का व्यापन करनेवाले हैं और (मथ्रा) = शत्रुओं को कुचल देनेवाले हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमारे इन्द्रियाश्व गतिशील वेगवान् बलवान् मार्ग का व्यापन करनेवाले व शत्रुओं को कुचलनेवाले हों।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे सनितः=दातः ! हे सुसनितः=परमदातः ! हे उग्र ! हे चित्र ! हे चेतिष्ठ=अतिशयेन चेतयितः ! हे सूनृत ! हे प्रसहा=विघ्नविनाशक शत्रुनिवारक ! हे सम्राट् ! त्वम्। वाजेषु=संसारसंग्रामेषु। सहुरिम्=सहनशीलम्। सहन्तम्= दुःखनिवारकम्। पूर्व्यम्=पुरातनं पूर्णम्। भुज्युं=भोग्यम्। धनं देहीति शेषः ॥२०॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Ten fleet dark brown horses with straight long tails instantly rushing to the target turn the whirling wheels of my chariot and beat the opposing forces.
