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अ॒स्माकं॒ सु रथं॑ पु॒र इन्द्र॑: कृणोतु सा॒तये॑ । न यं धूर्व॑न्ति धू॒र्तय॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asmākaṁ su ratham pura indraḥ kṛṇotu sātaye | na yaṁ dhūrvanti dhūrtayaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अस्माक॒म् । सु । रथ॑म् । पु॒रः । इन्द्रः॑ । कृ॒णो॒तु॒ । सा॒तये॑ । न । यम् । धूर्व॑न्ति । धू॒र्तयः॑ ॥ ८.४५.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:45» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:43» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:9


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (उत) और (मघवन्) हे धनसंयुक्त आत्मन् ! (त्वम्+शृणु) तू यह सुन (यत्) जो वस्तु (ते) तुझसे उपासक (वष्टि) चाहता है, (तत्) उस वस्तु को (ववक्षि) उसके लिये ले आता है, (यद्+वीळयासि) जिसको तू दृढ़ करता है (तत्+वीळु) वह दृढ़ ही होता है ॥६॥
भावार्थभाषाः - यह समस्त वर्णन सिद्ध जितेन्द्रिय आत्मा का है, यह ध्यान रखना चाहिये। भाव इसका यह है कि यदि आत्मा वश में हो और ईश्वरीय नियमवित् हो, तो उस आत्मा से कौन वस्तु प्राप्त नहीं होती। लोग आत्मा को नहीं जानते, अतः वे स्वयं दरिद्र बने रहते हैं। हे उपासको ! स्व आत्मा को पहिचानो ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

कैसा रथ ?

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इन्द्रः) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभु (अस्माकं) = हमारे (सु-रथं) = उत्तम रथ को (पुरः कृणोतु) = आगे करें। यह रथ शत्रुओं की ओर आक्रमण के लिए आगे ही बढ़े। (सातये) = यह सब धनों की प्राप्ति के लिए हो। 'काम' को पराजित करके हम 'स्वास्थ्य-धन' को प्राप्त करें। 'क्रोध' को जीतकर हम 'मानसशान्तिरूप धन' को प्राप्त करें। 'लोभ' को जीतकर हम 'ज्ञान धन' को प्राप्त करें। [२] हमारा यह रथ ऐसा हो कि (यं) = जिसे (धूर्तयः) = हिंसक शत्रु (न धूर्वन्ति) = हिंसित नहीं कर पायें। हो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमारा शरीर रथ आगे और आगे बढ़े। यह सब धनों का विजय करनेवाला किसी से हिंसित न हो।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - उत=अपि च। हे मघवन् ! धनवन् आत्मन् ! त्वमिदं शृणु। ते=त्वत्तः। यद् वष्टि=कामयते। तत् त्वम्। ववक्षि=तस्मै तद् वहसि। त्वं यद् वस्तु। वीळयासि=दृढीकरोषि। तद्वीळु तद् दृढमेव सर्वत्र भवतीत्यर्थः ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - May Indra, mighty warring soul, turn our chariot of body and the body politic to the heights of the first and foremost order of strength and excellence for the achievement of success and victory in the battle of life so that no enemies can violate it.