वांछित मन्त्र चुनें

प्रति॑ त्वा शव॒सी व॑दद्गि॒रावप्सो॒ न यो॑धिषत् । यस्ते॑ शत्रु॒त्वमा॑च॒के ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

prati tvā śavasī vadad girāv apso na yodhiṣat | yas te śatrutvam ācake ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

प्रति॑ । त्वा॒ । श॒व॒सी । व॒द॒त् । घि॒रौ । अप्सः॑ । न । यो॒धि॒ष॒त् । यः । ते॒ । श॒त्रु॒ऽत्वम् । आ॒ऽच॒के ॥ ८.४५.५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:45» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:42» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:5


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

फिर उसी के अर्थ को दृढ़ करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - जिन (एषाम्) इन मनुष्यों का (इध्मः) अग्निहोत्रोपकरण समिधा आदि (बृहन्+इत्) बड़ा है, जिनका (भूरि) बहुत (शस्तम्) स्तोत्र है, जिनका (स्वरुः) सदाचाररूप वज्र अथवा यज्ञोपलक्षक यूपखण्ड (पृथुः) महान् है, (येषाम्+इन्द्रः) जिनका आत्मा (युवा) सर्वदा कार्य करने में समर्थ हो (सखा) सखा है, वे धन्य हैं ॥२॥
भावार्थभाषाः - इस ऋचा से पुनः पूर्वोक्त अर्थ को ही दृढ़ करते हैं, भगवान् उपदेश देते हैं कि मनुष्य निज कल्याण के लिये प्रथम अग्निहोत्रादि कर्म अवश्य करे और अपने आत्मा को सदा दृढ़ बना रक्खे, तब ही कल्याण है ॥२॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

शवसी [माता]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे इन्द्र! (शवसी) = बलवती माता, गतमन्त्र से वर्णित प्रश्न को सुनकर (त्वा प्रतिवदत्) = तेरे प्रति कहती है (यः) = जो (ते) = तेरे (शत्रुत्वम् आचके) शत्रुत्व की कामना करता है, उसके साथ तू (गिरौ) = पर्वत पर (अप्सः न) = [अप्सु सरति] जल संचारी विद्युत् के समान (योधिषत्) = युद्ध कर । उस शत्रु पर ऐसे आक्रमण कर जैसे पर्वत पर विद्युत् का आक्रमण होता है। बिजली गिरती है और पत्थर छिन्न-भिन्न हो जाता है। इसी प्रकार तू शत्रुओं पर आक्रमण कर और शत्रु छिन्न-भिन्न हो जाएँ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- वीर माता सन्तान को उत्साहित करती हुई कहती है कि शत्रुओं पर तेरा आक्रमण इस प्रकार हो जैसे पर्वत पर विद्युत् पतन ।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पुनस्तमेवार्थं दृढयति।

पदार्थान्वयभाषाः - येषामेषां मनुष्याणाम्। इध्मः=अग्निहोत्रोपकरणम्। बृहन् इत्=बृहन्नेव। येषाम्। भूरि=बहु च। शस्तं=स्तोत्रम्। स्वरुः=सदाचाररूपो वज्रः। यद्वा यूपखण्डः। पृथुरस्ति। येषाञ्च। इन्द्र आत्मा। युवा सखा च। ते धन्याः ॥२॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of power and excellence, to you then the mighty mother, divine intelligence, would say: Whoever would take a hostile attitude toward you would fight against you like a seductive sorceress on the magic mountain.