मा न॒ एक॑स्मि॒न्नाग॑सि॒ मा द्वयो॑रु॒त त्रि॒षु । वधी॒र्मा शू॑र॒ भूरि॑षु ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
mā na ekasminn āgasi mā dvayor uta triṣu | vadhīr mā śūra bhūriṣu ||
पद पाठ
मा । नः॒ । एक॑स्मिन् । आग॑सि । मा । द्वयोः॑ । उ॒त । त्रि॒षु । वधीः॑ । मा । शू॒र॒ । भूरि॑षु ॥ ८.४५.३४
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:45» मन्त्र:34
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:48» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:34
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे (इन्द्र) परमैश्वर्य्यशालिन् परमोदार देव ! (मन्दानः) स्तुतिपाठकों के ऊपर प्रसन्न होकर उनको देने के लिये (यद्+दधिषे) जो वस्तु रखते हैं अथवा (मनस्यसि) करने का मन में निश्चय करते हैं यद्वा (प्र+इयक्षसि+इत्) जो वस्तु देही देते हैं। (तत्+मा+कः) वे सब आप करें या न करें, किन्तु (मृळय) हमको सब तरह से सुखी बनावें ॥३१॥
भावार्थभाषाः - इसका आशय यह है कि हमारे लिये आपको अनेक क्लेश उठाने पड़ते हैं। हम आपसे सदा माँगते रहते हैं, आप यथाकर्म उसे देते रहते हैं। यह सब न करके आप केवल हमारे लिए उतना कीजिये, जिससे हम सुखी रहें ॥३१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अनन्त कृपालु प्रभु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शूर) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभो! आप (नः) = हमें (एकस्मिन् आगसि) = एक अपराध में (मा वधीः) = मत हिंसित करिये। (द्वयोः) = दो अपराधों में भी (मामत) = दण्डित करिये। (उत) = और (त्रिषु) = तीन अपराधों में भी आपने हमें हिंसित न करना। [२] हे शूर ! (भूरिषु) = बहुत अपराधों के होने पर भी हमें (मा वधीः) = हिंसित न करियेगा । हमारे से कदम-कदम पर गलतियाँ तो होंगी ही। शक्ति व ज्ञान की अल्पता के कारण जब हम गलतियाँ कर बैठें, तो भी हम आपके कोपभाजन न हों। आप जैसे परम मित्र के द्वारा उत्तम प्रेरणा को प्राप्त कर हम शुभ मार्ग पर आगे बढ़ें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-हम गलतियों के होने पर भी प्रभु के अनग्रह के ही पात्र हों। प्रभु प्रेरणा को प्राप्त करके अपराधों से ऊपर उठें।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! मन्दानः=स्तुतिपाठकान् प्रति प्रीतः सन्। यद् वस्तु त्वं दधिषे=धारयसि। यन्मनस्यसि=कर्त्तुं मनसि अवधारयसि। यद्वा यदपि। प्र+इयक्षसि=इत्=प्रयच्छसि एव ॥३१॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O lord of magnanimous glory among the great heroes, not for one trespass, not for two, not for three, not even for many, uncountable, pray, hurt us not, and strike us not.
