वांछित मन्त्र चुनें

स॒त्यं तत्तु॒र्वशे॒ यदौ॒ विदा॑नो अह्नवा॒य्यम् । व्या॑नट् तु॒र्वणे॒ शमि॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

satyaṁ tat turvaśe yadau vidāno ahnavāyyam | vy ānaṭ turvaṇe śami ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒त्यम् । तत् । तु॒र्वशे॑ । यदौ॑ । विदा॑नः । अ॒ह्न॒वा॒य्यम् । वि । आ॒न॒ट् । तु॒र्वणे॑ । शमि॑ ॥ ८.४५.२७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:45» मन्त्र:27 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:47» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:27


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र परमैश्वर्य्ययुक्त महादेव ! आपकी कृपा से (इह) इस संसार में (त्वा) तुम्हारे उद्देश से (महे+राधसे) बहुत धनों की प्राप्ति के उत्सव के लिये (गोपरीणसा) गौवों के दूध, दही आदि पदार्थों से (मन्दन्तु) गृहस्थ जन परस्पर आनन्दित होवें और पुरुषार्थ करें। हे महेन्द्र ! (यथा) जैसे (गौरः) तृषित मृग (सरः) सरस्थ जल पीता है, तद्वत् आप बड़ी उत्कण्ठा के साथ यहाँ आकर (पिब) हमारे समस्त पदार्थों का अवलोकन करें ॥२४॥
भावार्थभाषाः - जब-२ नवीन अन्न या अधिक लाभ हो, तब-२ मनुष्य को उचित है कि वे ईश्वर के नाम पर अपने परिजनों तथा मित्रों को बुलाकर उत्सव करें और ईश्वर को धन्यवाद देवें ॥२४॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

यदु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (तुर्वशे) = त्वरा से शत्रुओं को वश में करनेवाले (यदौ) = यत्नशील जन में (तत्) = उस (अह्नवाय्यम्) = न छिपाए जाने की आवश्यकतावाले सत्य को (विदानः) = जानता हुआ पुरुष (तुर्वणे) = इस जीवनसंग्राम में (शमि) = कर्म को (व्यानट्) = व्याप्त करता है सदा क्रियाशील बनता है। [२] यह क्रियाशीलता ही उसे व्यसनों से बचाकर सत्यमार्ग की ओर ले चलती है। सत्य का निवास 'तुर्वश, व यदु' में ही होता हे। 'यदु' ही 'तुर्वश' भी बन पाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम अपने में सत्य को धारण करने के लिए काम-क्रोध आदि शत्रुओं को वश में करनेवाले [तुर्वश] यत्नशील [यदु] बनें, सदा उत्तम कर्मों में लगे रहें।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! इह=संसारे। त्वा=त्वदुद्देशेन। महे=महते। राधसे=धनाय। जनाः। गोपरीणसा=गवां दग्धैः दधिभिः घृतप्रभृतिभिश्च। मन्दन्तु=आनन्दन्तु परस्परम्। हे इन्द्र ! तृषितः। गौरो मृगः। सरः=सरस्थं जलं पिबति। तथा त्वमपि। पिब=उत्कटेच्छया सर्वमवलोकय ॥२४॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Knowing the truth of the daily behaviour of the simple man of rectitude, Indra clears the path of peace and goodness in his battle of life.