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मा त्वा॑ मू॒रा अ॑वि॒ष्यवो॒ मोप॒हस्वा॑न॒ आ द॑भन् । माकीं॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ वनः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

mā tvā mūrā aviṣyavo mopahasvāna ā dabhan | mākīm brahmadviṣo vanaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मा । त्वा॒ । मू॒राः । अ॒वि॒ष्यवः॑ । मा । उ॒प॒ऽहस्वा॑नः । आ । द॒भ॒न् । माकी॑म् । ब्र॒ह्म॒ऽद्विषः॑ । व॒नः॒ ॥ ८.४५.२३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:45» मन्त्र:23 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:46» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:23


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (शवसः+पते) हे बलाधिदेव इन्द्र ! (न) जैसे (जिव्रयः) जीर्ण वृद्ध पुरुष (रम्भम्) दण्ड को अपना अवलम्बन बनाते हैं, तद्वत् हम (त्वाम्) आपको (आ+ररम्भ) अपना अवलम्बन और आश्रय बनाते हैं (आ) और सदा (त्वाम्) आपको (सधस्थे) यज्ञस्थान में (उश्मसि) चाहते हैं ॥२०॥
भावार्थभाषाः - हे मनुष्यों ! ईश्वर को अपना आश्रय बनाओ। उस पर विश्वास करो। प्रत्येक शुभकर्म में उसकी उपासना करो ॥२०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

किनके संग से बचना ?

पदार्थान्वयभाषाः - [१] प्रभु जीव से कहते हैं कि (त्वा) = तुझे (अविष्यवः) = [अव्-हिंसा, आदान] औरों की हिंसा से सांसारिक ऐश्वर्यों का आदान करनेवाले, (उपहस्वानः) = धर्म व नैतिक मार्ग का उपहास करनेवाले (मूराः) = विषयों से मूढ़ बने हुए लोग (त्वा) = आपको (मा आदभन्) = हिंसित करनेवाले न हों। इनके दबाव में तू भी इनके रंग में न रंगा जाए। [२] (ब्रह्मद्विषः) = ज्ञान व प्रभु के प्रति न प्रीतिवाले लोगों को (माकीं वनः) = सेवन करनेवाला न हो। ऐसों के संग में मत उठ बैठ ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम विषयमूढ़, हिंसा से संग्रह की प्रवृत्तिवाले, धामक बातों का उपहास करनेवाले, ज्ञान की प्रति अरुचिवाले लोगों का संग न करें।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे शवसस्पते ! हे बलस्याधिपते इन्द्र ! रम्भं न जिव्रयः=यथा जिव्रयो जीर्णा वृद्धा मनुष्या रम्भम्=दण्डमालम्बन्ते। तथैव वयमपि। त्वा=त्वामेव। आ ररम्भ=आरभामहे। अपि च त्वा=त्वाम्। सधस्थे=यज्ञस्थाने उश्मसि=कामयामहे ॥२०॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Let the fools and scoffers never get round you, even if they profess that they are keen to please you, for protection and support. Never support the negationists of knowledge, piety, existence and divinity.