स्तो॒त्रमिन्द्रा॑य गायत पुरुनृ॒म्णाय॒ सत्व॑ने । नकि॒र्यं वृ॑ण्व॒ते यु॒धि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
stotram indrāya gāyata purunṛmṇāya satvane | nakir yaṁ vṛṇvate yudhi ||
पद पाठ
स्तो॒त्रम् । इन्द्रा॑य । गा॒य॒त॒ । पु॒रु॒ऽनृ॒म्णाय । सत्व॑ने । नकिः॑ । यम् । वृ॒ण्व॒ते । यु॒धि ॥ ८.४५.२१
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:45» मन्त्र:21
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:46» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:21
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे ईश्वर ! (यद्) यदि तू हम लोगों का (इमम्+हवम्) इस आह्वान को (शुश्रूयाः) एकवार भी सुन चुका है, तो उसको (दुर्मर्षम्) अविस्मरणीय (चक्रियाः) बनाओ (उत) और (नः) सकल जनसमुदाय का तू (अन्तमः) अतिशय समीपवर्ती (आपिः+भवेः) बन्धु और मित्र हो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - यह स्वाभाविक प्रार्थना है। ईश्वर को सब ही अपना बन्धु बनाना चाहते हैं, परन्तु वह किसका सखा बनता है, यह पुनः-पुनः विचारना चाहिये ॥१८॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'पुरुनृम्ण सत्वा' प्रभु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे मनुष्यो ! (यं) = जिसको (युधि) = युद्ध में (नकिः वृण्वते) = कोई भी रोक नहीं सकता, उस (सत्वने) = बलशाली, शत्रुओं का सादन करनेवाले (पुरुनृम्णाय) = बहुत धनों व शक्तियों के स्वामी (इन्द्राय) = शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभु के लिए (स्तोत्रं गायत) = स्तुति का गायन करो। [२] इस संसार संघर्ष में प्रभु ने ही हमें विजय प्राप्त करानी है। प्रभु अनन्तशक्ति व धनवाले हैं, सब शत्रुओं का सादन करनेवाले हैं। प्रभु का गायन करते हुए उस शक्ति से शक्तिसम्पन्न होकर हम शत्रुओं को पराजित कर पाते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - अनन्त शक्ति व धनवाले शत्रुसंहारक प्रभु का ही हम स्तवन करें। प्रभु युद्ध में अपराजेय हैं।
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र। यद्=यदि त्वम्। अस्माकमेकवारमपि। इमं हवम्=स्तोत्रम्। शुश्रूयाः=शृणुयाश्चेत् तर्हि। तं हवम्। दुर्मर्षम्=अविस्मरणीयम्। चक्रियाः=कुर्व्याः। उत=अपि च। नोऽस्माकम्। अन्तमः=अन्तिकतमः अतिशयनिकटवर्ती। आपिर्बन्धुः सखा। भवेः=भव ॥१८॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Sing songs of adoration and prayer in honour of Indra, lord of world’s power and wealth. Who can ignore and neglect him in the battle of life?
