ए॒वा वा॑मह्व ऊ॒तये॒ यथाहु॑वन्त॒ मेधि॑राः । इन्द्रा॑ग्नी॒ सोम॑पीतये ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
evā vām ahva ūtaye yathāhuvanta medhirāḥ | indrāgnī somapītaye ||
पद पाठ
ए॒व । वा॒म् । अ॒ह्वे॒ । ऊ॒तये॑ । यथा॑ । अहु॑वन्त । मेधि॑राः । इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । सोम॑ऽपीतये ॥ ८.३८.९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:38» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:21» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:9
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शिव शंकर शर्मा
पुनः उसी विषय को कहते हैं।
पदार्थान्वयभाषाः - (नरा) हे प्रजानेता (इन्द्राग्नी) राजन् तथा दूत ! आप दोनों (गायत्रवर्तनिम्) गायत्रीछन्दोयुक्त (मम) मेरी (इमाम्+सुष्टुतिम्) इस शोभन स्तुति को (जुषेथाम्) सेवें और तदर्थ (आगतम्) यहाँ आवें। ॥६॥
भावार्थभाषाः - प्रजाजन जहाँ राजा को बुलावें, वहाँ सगण जाकर रक्षा करें ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
मेधिर की तरह
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्राग्नी) = बल व प्रकाश के दिव्यभावो ! मैं (वाम्) = आप दोनों को (ऊतये) = रक्षण के लिए (एवा) = इस प्रकार (अह्वे) = पुकारता हूँ, (यथा) = जैसे (मेधिराः) = बुद्धिमान् पुरुष (अहुवन्त) = पुकारते हैं । [२] हे इन्द्राग्नी! आप (सोमपीतये) = मेरे जीवन में सोम के रक्षण के लिए होते हो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- बल व प्रकाश का आराधन हमारे जीवन में सोमरक्षण करता हुआ हमारा रक्षण करता है। हमें रोगों व वासनाओं से आक्रान्त होने से बचाता है। ऋषिः
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शिव शंकर शर्मा
पुनस्तदेवाह।
पदार्थान्वयभाषाः - हे नरा=नेतारौ इन्द्राग्नी=राजदूतौ ! युवाम्। गायत्र- वर्तनिम्=गायत्रमार्गयुताम्=गायत्रीछन्दोयुताम्। ममेमाम्= सष्टुतिम्=शोभनां स्तुतिम्। जुषेथाम्=सेवेथाम्। तथा आगतम्=आगच्छतम् ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra and Agni, leaders of the nation’s light and fire energy, just as holy scholars and sages invoke you for protection and promotion, so do I invoke and call upon you to come and join us at the soma session of our yajna.
