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तो॒शासा॑ रथ॒यावा॑ना वृत्र॒हणाप॑राजिता । इन्द्रा॑ग्नी॒ तस्य॑ बोधतम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tośāsā rathayāvānā vṛtrahaṇāparājitā | indrāgnī tasya bodhatam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तो॒षासा॑ । र॒थ॒ऽयावा॑ना । वृ॒त्र॒ऽहना॑ । अप॑राऽजिता । इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । तस्य॑ । बो॒ध॒त॒म् ॥ ८.३८.२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:38» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:20» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:2


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'रोगों व वासनाओं के विनाशक' इन्द्राग्नी

पदार्थान्वयभाषाः - [१] ये (इन्द्राग्नी) = इन्द्र और अग्नि (तोशासा) = रोगरूप शत्रुओं का संहार करनेवाले व (रथयावाना) = इस शरीररथ को लक्ष्य स्थान की ओर ले चलनेवाले हैं। रोग यात्रा में विघ्न पैदा कर देते हैं और आगे बढ़ना रुक जाता है। ये बल व प्रकाश के दिव्यभाव रोगों को समाप्त करके हमें आगे बढ़ाते हैं। [२] ये (वृत्रहण) = ज्ञान की आवरण कामवासना को नष्ट करनेवाले हैं और (अपराजिता) = कभी पराजित होनेवाले नहीं। ये इन्द्र और अग्नि (तस्य) = हमारे उस जीवनयज्ञ का (बोधतम्) = ध्यान करें-उसे सम्यक् परिपूर्ण करें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- बल व प्रकाश के दिव्य भाव रोगों को नष्ट कर शरीररथ को लक्ष्य स्थान की ओर ले चलते हैं। ये वासना को नष्ट करते हैं और कभी काम-क्रोध आदि से पराजित नहीं होते।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ruling to the satisfaction of the people, going by chariot and reaching fast wherever needed, destroying the evils of darkness, ignorance, want and demonic injustice and exploitation, never frustrated or defeated but always victorious, Indra and Agni, ruler and enlightened sage and scholar, know this purpose well, follow and never relent.