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क्ष॒त्राय॑ त्व॒मव॑सि॒ न त्व॑माविथ शचीपत॒ इन्द्र॒ विश्वा॑भिरू॒तिभि॑: । माध्यं॑दिनस्य॒ सव॑नस्य वृत्रहन्ननेद्य॒ पिबा॒ सोम॑स्य वज्रिवः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

kṣatrāya tvam avasi na tvam āvitha śacīpata indra viśvābhir ūtibhiḥ | mādhyaṁdinasya savanasya vṛtrahann anedya pibā somasya vajrivaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

क्ष॒त्राय॑ । त्व॒म् । अव॑सि । न । त्व॒म् । आ॒वि॒थ॒ । श॒ची॒ऽप॒ते॒ । इन्द्र॑ । विश्वा॑भिः । ऊ॒तिऽभिः॑ । माध्य॑न्दिनस्य । सव॑नस्य । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । अ॒ने॒द्य॒ । पिब॑ । सोम॑स्य । व॒ज्रि॒ऽवः॒ ॥ ८.३७.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:37» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:19» मन्त्र:6 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'निराधार, पर सर्वाधार' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - हे (शचीपते) = सब प्रज्ञानों व कर्मों के स्वामिन्! (इन्द्र) = सर्वशत्रुविद्रावक प्रभो ! (त्वम्) = आप (विश्वाभिः ऊतिभिः) = सब रक्षणों के द्वारा आप (क्षत्राय) = बल की प्राप्ति के लिए (अवसि) = हमारा रक्षण करते हैं। (त्वं न आविथ) = आप किसी दूसरे से रक्षित नहीं किये जाते । अवशिष्ट मन्त्र भाग मन्त्र संख्या एक पर देखिए ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:- प्रभु सबके रक्षक हैं। प्रभु का कोई अन्य रक्षक नहीं। निराधार प्रभु ही सर्वाधार हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of sacred word and irresistible action, with all your methods and policies of protection and progress you deploy your forces for the defence and advancement of the nation, not for your own personal security. O lord of awesome power and justice, destroyer of demonic violence and exploitation, come and taste the pleasure of our soma of peace and progress at the peak of our day’s achievement.