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स्तोमं॑ जुषेथां युव॒शेव॑ क॒न्यनां॒ विश्वे॒ह दे॑वौ॒ सव॒नाव॑ गच्छतम् । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण॒ चेषं॑ नो वोळ्हमश्विना ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

stomaṁ juṣethāṁ yuvaśeva kanyanāṁ viśveha devau savanāva gacchatam | sajoṣasā uṣasā sūryeṇa ceṣaṁ no voḻham aśvinā ||

पद पाठ

स्तोम॑म् । जु॒षे॒था॒म् । यु॒व॒शाऽइ॑व । क॒न्यना॑म् । विश्वा॑ । इ॒ह । दे॒वौ॒ । सव॑ना । अव॑ । ग॒च्छ॒त॒म् । स॒ऽजोष॑सौ । उ॒षसा॑ । सूर्ये॑ण । च॒ । सोम॑म् । पि॒ब॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.३५.५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:35» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:14» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:5


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विनौ+देवौ) हे राजदेव तथा मन्त्रिमण्डलदेव ! आप दोनों (सोमम्) प्रार्थनाओं को (जुषेथाम्) प्रीतिपूर्वक सेवें। यहाँ दृष्टान्त देते हैं (युवशा+इव) जैसे युवा पुरुष (कन्यनाम्) कन्याओं की बातें सुनते हैं। (इह) इस संसार में इत्यादि पूर्ववत् ॥५॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

स्तवन- तेजस्विता

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्राणापानो! आप (स्तोमं जुषेथाम्) = प्रभु के स्तोत्र का सेवन करो तथा (युवशा इव) = युवावस्था में निवास करनेवाले युवकों के समान (कन्यनाम्) = [ कन दीप्तौ] दीप्ति का सेवन करो। शेष पूर्ववत् ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना से स्तवन की वृत्ति व दीप्ति [तेजस्विता ] प्राप्त होती है।
अन्य संदर्भ: सूचना - अवशिष्ट मन्त्र भाग मन्त्र संख्या चार की व्याख्या में द्रष्टव्य है।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विनौ देवौ ! युवां स्तोमं स्तुतिं जुषेथाम् प्रीत्या सेवेथाम्। अत्र दृष्टान्तः युवशा इव=यथा युवानौ (कन्यनां) कन्यानामाह्वानं सेवेते। तद्वत्। व्याख्यातमन्यत् ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Divine Ashvins, twin complementarities of nature and humanity, generous brilliancies, listen and cherish our song of adoration as youthful lovers listen to a lovely brilliant maiden’s, come to our sessions, understand our purpose, and united with the dawn and the sun, transmit to us food and energy in plenty here and now.