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न॒मो॒वा॒के प्रस्थि॑ते अध्व॒रे न॑रा वि॒वक्ष॑णस्य पी॒तये॑ । आ या॑तमश्वि॒ना ग॑तमव॒स्युर्वा॑म॒हं हु॑वे ध॒त्तं रत्ना॑नि दा॒शुषे॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

namovāke prasthite adhvare narā vivakṣaṇasya pītaye | ā yātam aśvinā gatam avasyur vām ahaṁ huve dhattaṁ ratnāni dāśuṣe ||

पद पाठ

न॒मः॒ऽवा॒के । प्रऽस्थि॑ते । अ॒ध्व॒रे । न॒रा॒ । वि॒वक्ष॑णस्य । पी॒तये॑ । आ । या॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । आ । ग॒त॒म् । अ॒व॒स्युः । वा॒म् । अ॒हम् । हु॒वे॒ । ध॒त्तम् । रत्ना॑नि । दा॒शुषे॑ ॥ ८.३५.२३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:35» मन्त्र:23 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:17» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:23


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे अश्विद्द्वय (नरा) हे सर्वनेता राजन् तथा मन्त्रिदल ! (नमोवाके) जिसमें नमः शब्द का उच्चारण हो, ऐसे (अध्वरे) यज्ञ के (प्रस्थिते) प्रस्तुत होने पर आप दोनों ! (विवक्षणस्य) प्रवहणशील सोम के (पीतये) पीने के लिये (आयातम्) आवें। शेष पूर्ववत् ॥२३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

नमस्कार-अध्वर

पदार्थान्वयभाषाः - [१ हे (नरा) = उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! आप (नमोवाके प्रस्थिते) = प्रभु के प्रति नमस्कार वचनों के प्रस्थित होने पर, प्रभु की प्रति नम उक्ति के करने पर तथा अध्वरे यज्ञों के होने पर (विवक्षणस्य पीतये) = विशिष्ट उन्नति के साधनभूत सोम के [ वक्ष् To grow पान के लिये प्राप्त होवो। अव]शिष्ट मन्त्र भाग २२ मन्त्र पर द्रष्टव्य है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्राणसाधना के साथ प्रभु के प्रति नमन करें तथा यज्ञात्मक कर्मों में प्रवृत्त हों । यही सोमरक्षण का मार्ग है।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विनौ ! नरा नेतारौ ! नमोवाके नमोवचने नमः शब्दस्य वाग् उच्चारणं यत्र तस्मिन्। अध्वरे यागे प्रस्थिते उपस्थिते प्रस्तुते सति। युवाम्। विवक्षणस्य प्रवहणशीलस्य सोमस्य पीतये। आगच्छतम्। शेषं पूर्ववत् ॥२३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, complementary leading powers of humanity, the yajna of love and non-violence with words of reverence and homage is begun, the soma is refreshing and overflowing, pray come to drink the soma and join the celebration. Come and come again. Praying for protection and promotion, I call upon you to come and bless the generous yajaka with the jewels of life.