वांछित मन्त्र चुनें

धे॒नूर्जि॑न्वतमु॒त जि॑न्वतं॒ विशो॑ ह॒तं रक्षां॑सि॒ सेध॑त॒ममी॑वाः । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण च॒ सोमं॑ सुन्व॒तो अ॑श्विना ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

dhenūr jinvatam uta jinvataṁ viśo hataṁ rakṣāṁsi sedhatam amīvāḥ | sajoṣasā uṣasā sūryeṇa ca somaṁ sunvato aśvinā ||

पद पाठ

धे॒नूः । जि॒न्व॒त॒म् । उ॒त । जि॒न्व॒त॒म् । विशः॑ । ह॒तम् । रक्षां॑सि । सेध॑तम् । अमी॑वाः । स॒ऽजोष॑सौ । उ॒षसा॑ । सूर्ये॑ण । च॒ । सोम॑म् । पि॒ब॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.३५.१८

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:35» मन्त्र:18 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:16» मन्त्र:6 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:18


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे राजन् ! और हे मन्त्रिमण्डल ! आप दोनों मिलकर (धेनूः) गौवों को (जिन्वतम्) बढ़ाया करें (उत) और उनके रक्षक (विशः) वैश्य जाति अर्थात् व्यापारिक दल को (जिन्वतम्) प्रसन्न रक्खा करें ॥१८॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्राणसाधना-गोदुग्ध सेवन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! आप सोम के सम्पादन के द्वारा (धेनूः जिन्वतम्) = गौओं का वर्धन करो और गोदुग्ध द्वारा (विशः) = सब प्रजाओं का (जिन्वतम्) = वर्धन करो। अवशिष्ट मन्त्रभाग मन्त्र संख्या १६ पर द्रष्टव्य है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधक को चाहिए कि खुले वायु में प्रचार [घूमना] करनेवाली गौओं के दुग्ध का पान करके अपना वर्धन करे। प्राणसाधना के साथ गोदुग्ध सेवन करते हुए हम नीरोग जीवन बिताते हुए वृद्धि को प्राप्त करें।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे राजानौ ! उत। धेनूर्गाः जिन्वतं=वर्धयतम्। तद्रक्षकान् विशो जिन्वतं प्रसादयतम्। शिष्टं व्याख्यातम् ॥१८॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, complementary powers of the nation’s development and progress, develop the animal wealth for milk, develop and energise the agricultural, industrial and commercial classes, destroy evil and the saboteurs, eliminate all negativities and, in unison with the sun and the rise of every new day, create and recreate the soma of new joy and enthusiasm for life.