सप्ती॑ चिद्घा मद॒च्युता॑ मिथु॒ना व॑हतो॒ रथ॑म् । ए॒वेद्धूर्वृष्ण॒ उत्त॑रा ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
saptī cid ghā madacyutā mithunā vahato ratham | eved dhūr vṛṣṇa uttarā ||
पद पाठ
सप्ती॒ इति॑ । चि॒त् । घ॒ । म॒द॒ऽच्युता॑ । मि॒थु॒ना । व॒ह॒तः॒ । रथ॑म् । ए॒व । इत् । धूः । वृष्णः॑ । उत्ऽत॑रा ॥ ८.३३.१८
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:33» मन्त्र:18
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:10» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:18
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'मदच्युता मिथुना' सप्ती
पदार्थान्वयभाषाः - [१] पति-पत्नी तो (चित् घा) = निश्चय से इस गृहस्थ शकट के (सप्ती) = अश्व हैं। अश्वों के समान ये गृहस्थ शकट का ठीक से वहन करते हैं। (मदच्युता) = मद को छोड़नेवाले, अभिमान को न करनेवाले (मिथुना) = स्त्री पुमान् [ पति-पत्नी] ही मिलकर (रथं वहतः) = गृहस्थ-रथ को ठीक लक्ष्य- स्थान पर पहुँचाते हैं। [२] ऐसा होते हुए भी (वृष्णः) = वीर्य का सेचन करनेवाले से पुरुष (धूः) = गृहस्थ शकट की धुरा के समान यह स्त्री उत्तरा (एव इत्) = निश्चय से उत्कृष्ट है। रथ में अश्व से जैसे धुरा ऊपर होती है, इसी प्रकार पिता से माता का महत्त्व अधिक है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ अभिमान को छोड़कर परस्पर मिलकर पति-पत्नी गृहस्थयज्ञ को पूर्ण करते हैं। माता का मान निश्चय से पिता से अधिक है।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - If the two ardent horses of Indra’s chariot together draw the burden of the home-state, then the shaft of the chariot is better and stronger.
