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न॒हि षस्तव॒ नो मम॑ शा॒स्त्रे अ॒न्यस्य॒ रण्य॑ति । यो अ॒स्मान्वी॒र आन॑यत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nahi ṣas tava no mama śāstre anyasya raṇyati | yo asmān vīra ānayat ||

पद पाठ

न॒हि । सः । तव॑ । नः॒ । मम॑ । शा॒स्त्रे । अ॒न्यस्य॑ । रण्य॑ति । यः । अ॒स्मान् । वी॒रः । आ । अन॑यत् ॥ ८.३३.१६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:33» मन्त्र:16 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:10» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:16


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'शासन' रक्षण के लिये

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (यः वीरः) = जो शत्रुओं को कम्पित करनेवाला वीर अस्मान् = हमें (आनयत्) = लक्ष्य- स्थान पर प्राप्त कराता है, (सः) = वह (नहि तव) = न तेरे, (नो मम) = न मेरे, न ही अन्यस्य किसी दूसरे के (शास्त्रे) = शास्त्र में (रण्यति) = आनन्द का अनुभव करता है। वे प्रभु तो रक्षण में ही आनन्द लेते हैं। [२] प्रभु का शासन शासन के लिए नहीं है। वह केवल रक्षण के लिये है। शासन का उद्देश्य शासन न होकर रक्षण ही होना उचित है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु हमारे पर, हमारे रक्षण के लिये ही शासन करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The mighty one who has brought us under his order of law does not accept with delight your decree nor mine nor anyone else’s.$(Indra, the soul, is the ruler and controller of the mind and senses. It is not ruled and controlled by the mind or the senses or anyone else.)