उ॒त नो॒ गोम॑तस्कृधि॒ हिर॑ण्यवतो अ॒श्विन॑: । इळा॑भि॒: सं र॑भेमहि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
uta no gomatas kṛdhi hiraṇyavato aśvinaḥ | iḻābhiḥ saṁ rabhemahi ||
पद पाठ
उ॒त । नः॒ । गोऽम॑तः । कृ॒धि॒ । हिर॑ण्यऽवतः । अ॒श्विनः॑ । इळा॑भिः । सम् । र॒भे॒म॒हि॒ ॥ ८.३२.९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:32» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:2» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:9
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
गोमतः, हिरण्यवतः अश्विनः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो! आप (नः) = हमें (उत) = निश्चय से (गोमतः) = प्रशस्त ज्ञानेन्द्रियोंवाला (कृधि) = करिये। (हिरण्यवतः) = [हिरण्यं वै वीर्यम्] प्रशस्त वीर्यवाला करिये तथा (अश्विनः) = उत्तम कर्मेन्द्रियरूप अश्वोंवाला करिये। इस हिरण्य-वीर्य के रक्षण के द्वारा ही आप हमें उत्तम ज्ञानेन्द्रियों व कर्मेन्द्रियोंवाला बनाते हैं। [२] हे प्रभो ! आप के अनुग्रह से हम (इडाभिः) = इन वेद-वाणियों के साथ (संरभेमहि) = सम्यक् उद्योगवाले हों। हमारे सब कार्य इन वेद-वाणियों के अनुसार हों। वस्तुतः वीर्यरक्षण द्वारा उत्तम इन्द्रियोंवाले बनकर हम क्यों न उत्तम कार्यों में प्रवृत्त होंगे ?
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु के अनुग्रह से [क] हम वीर्यरक्षण द्वारा प्रशस्त ज्ञानेन्द्रियों व कर्मेन्द्रियोंवाले बनें, [ख] तथा वेदवाणियों के अनुसार यज्ञादि उत्तम कर्मों में प्रवृत्त रहें ।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - And make us rich in lands and cows, knowledge and culture, make us masters of the golden glories of life. Advance us with horses and victories of high and higher attainments in honour and excellence. And lead us to exert ourselves in unison with songs of adoration and libations of homage and gratitude with holy words of joy.
