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पन्य॒ इदुप॑ गायत॒ पन्य॑ उ॒क्थानि॑ शंसत । ब्रह्मा॑ कृणोत॒ पन्य॒ इत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

panya id upa gāyata panya ukthāni śaṁsata | brahmā kṛṇota panya it ||

पद पाठ

पन्ये॑ । इत् । उप॑ । गा॒य॒त॒ । पन्ये॑ । उ॒क्थानि॑ । शं॒स॒त॒ । ब्रह्म॑ । कृ॒णो॒त॒ । पन्ये॑ । इत् ॥ ८.३२.१७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:32» मन्त्र:17 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:4» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:17


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गायन-स्तवन- तप

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (पन्ये इत्) = उस स्तुति के योग्य प्रभु के विषय में ही उपगायत गायन करो । (पन्ये) = उस स्तुत्य प्रभु के विषय में ही (उक्थानि) = स्तोत्रों का शंसत-शंसन व उच्चारण करो। [२] (पन्ये) = उस प्रभु की प्राप्ति के निमित्त (इत्) = निश्चय से (ब्रह्मा) = विविध तपस्याओं को (कृणोत) = करो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु के गुणों का गायन करें। प्रभु का ही स्तवन करें। प्रभु प्राप्ति के निमित्त विविध तपस्याओं को करनेवाले बनें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Sing in honour of adorable Indra, recite your hymns of praise in honour of admirable Indra, create your orations to celebrate the glorious Indra.