नकि॑रस्य॒ शची॑नां निय॒न्ता सू॒नृता॑नाम् । नकि॑र्व॒क्ता न दा॒दिति॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
nakir asya śacīnāṁ niyantā sūnṛtānām | nakir vaktā na dād iti ||
पद पाठ
नकिः॑ । अस्य॑ । शची॑नाम् । नि॒ऽय॒न्ता । सू॒नृता॑नाम् । नकिः॑ । व॒क्ता । न । दा॒त् । इति॑ ॥ ८.३२.१५
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:32» मन्त्र:15
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:3» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:15
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'नियन्ता दाता' प्रभु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अस्य) = इस प्रभु की (सूनृतानाम्) = [सु+ऊन् ऋत] उत्तम दुःखों का परिहाण करनेवाली व सत्य (शचीनाम्) = शक्तियों व प्रज्ञानों का (नकिः नियन्ता) = कोई नियन्ता [ रोकनेवाला] नहीं है। प्रभु अपनी शक्ति से सबका नियमन करते हैं। प्रभु का नियन्ता कोई नहीं । [२] संसार में ऐसा (वक्ता) = कहनेवाला भी (नकिः) = कोई नहीं कि (न दात् इति) = प्रभु ने हमें नहीं दिया। प्रभु कर्मानुसार जिस भी स्थिति में हमें रखते हैं, उस स्थिति में उन्नति के लिये सब आवश्यक साधनों को प्राप्त कराते ही हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु सब शक्तियों व प्रज्ञानों के स्वामी हैं। हमें उन्नति के लिये सब आवश्यक साधनों को प्राप्त कराते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - None is the controller of his mighty acts and powers universally pleasant and true, and there is none who can ever say: He has failed to give and bless.
