आ॒य॒न्तारं॒ महि॑ स्थि॒रं पृत॑नासु श्रवो॒जित॑म् । भूरे॒रीशा॑न॒मोज॑सा ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
āyantāram mahi sthiram pṛtanāsu śravojitam | bhūrer īśānam ojasā ||
पद पाठ
आ॒ऽय॒न्तार॑म् । महि॑ । स्थि॒रम् । पृत॑नासु । श्र॒वः॒ऽजित॑म् । भूरेः॑ । ईशा॑नम् । ओज॑सा ॥ ८.३२.१४
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:32» मन्त्र:14
| अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:3» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:14
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'यन्ता-जेता-ईशान' प्रभु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] गत मन्त्र के अनुसार 'तं इन्द्रं अभिगायत' उस इन्द्र का गायन करो जो (आयन्तारम्) = समन्तात् नियमन करनेवाले हैं, सम्पूर्ण संसार को वश में करनेवाले हैं। (पृतनासु) = संग्रामों में (महि) = महान् (स्थिरम्) = स्थिर (श्रवः जितम्) = यश का विजय करनेवाले हैं। प्रभु कभी पराजित तो होते ही नहीं। [२] उस प्रभु का गायन करो जो (ओजसा) = ओजस्विता के द्वारा (भूरेः ईशानम्) = सब पालक व पोषक धनों के स्वामी हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम उस प्रभु का गायन करें जो 'सर्वनियन्ता, संग्राम विजेता व धनों के ईशान ' हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Honour and adore the lord and ruler who is great, controller of the world and its law, constant in the dynamics of existence wherein he is the sole conqueror of honour and glory and who, with his power and grandeur, is the ruler of the vast riches of the world.
