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बृ॒बदु॑क्थं हवामहे सृ॒प्रक॑रस्नमू॒तये॑ । साधु॑ कृ॒ण्वन्त॒मव॑से ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

bṛbadukthaṁ havāmahe sṛprakarasnam ūtaye | sādhu kṛṇvantam avase ||

पद पाठ

बृ॒बत्ऽउ॑क्थम् । ह॒वा॒म॒हे॒ । सृ॒प्रऽक॑रस्नम् । ऊ॒तये॑ । साधु॑ । कृ॒ण्वन्त॑म् । अव॑से ॥ ८.३२.१०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:32» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:3» वर्ग:2» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:5» मन्त्र:10


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'बृबदुक्थ-सृप्रकरस्त्र' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हम (बृबदुक्थम्) = [बृहत् उक्थं] महान् स्तुतिवाले प्रभु को (ऊतये) = रक्षण के लिये (हवामहे) = पुकारते हैं। प्रभु का स्तवन ही हमें सब आसुर भावों के आक्रमण से बचाता है। ये प्रभु (सृप्रकरस्त्रम्) = प्रसृत बाहुवाले हैं, विशाल क्रियामय भुजाओंवाले हैं। प्रभु इन भुजाओं से हमारा पालन करते हैं। वे सर्वव्यापक प्रभु 'सर्वतो बाहु' हैं, उनमें सर्वत्र भुजाओं के गुण विद्यमान हैं। [२] हम अवसे पालन के लिये इस प्रभु को पुकारते हैं जो साधु (कृण्वन्तम्) = प्रत्येक वस्तु को सुन्दरता से कर रहे हैं। प्रभु के किसी भी कार्य में असौन्दर्य व अपूर्णता नहीं है। प्रभु की उपासना करते हुए हम इन वस्तुओं का ठीक प्रयोग करेंगे तो अवश्य अपना रक्षण व पालन कर पायेंगे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-वे प्रभु महान् स्तुतिवाले, प्रसृत भुजाओंवाले व सब बातों को सुन्दरता से करनेवाले हैं। इन प्रभु को हम रक्षण व पालन के लिये पुकारते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - We invoke the lord divine and master ruler who is highly adorable, of long and supple arms of generosity, and always does good for the protection and promotion of all.