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जु॒हु॒रा॒णा चि॑दश्वि॒ना म॑न्येथां वृषण्वसू । यु॒वं हि रु॑द्रा॒ पर्ष॑थो॒ अति॒ द्विष॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

juhurāṇā cid aśvinā manyethāṁ vṛṣaṇvasū | yuvaṁ hi rudrā parṣatho ati dviṣaḥ ||

पद पाठ

जु॒हु॒रा॒णा । चि॒त् । अ॒श्वि॒ना॒ । आ । म॒न्ये॒था॒म् । वृ॒ष॒ण्व॒सू॒ इति॑ वृषण्ऽवसू । यु॒वम् । हि । रु॒द्रा॒ । पर्ष॑थः । अति॑ । द्विषः॑ ॥ ८.२६.५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:26» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:26» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:5


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शिव शंकर शर्मा

पुनः राजकर्म कहते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (वृषण्वसू) हे वर्षणशील धनयुक्त (अश्विना) हे राजा तथा मन्त्रिदल ! (जुहुराणा+चित्) कुटिल पुरुषों को (मन्येथाम्) विविध दूत द्वारा जानें और उनको सत्पथ में लावें (रुद्रा) भयङ्कर (युवम्) आप दोनों मिलकर (द्विषः) परस्पर द्वेषी और धर्म-कर्म से परस्पर द्वेष रखनेवाले (अति+पर्षथः) दण्ड देवें ॥५॥
भावार्थभाषाः - राष्ट्रकर्मचारियों को उचित है कि परस्पर द्वेष, हिंसा आदि अवगुण को दूर करें। और उपद्रवकारी जनों को यथाविधि दण्ड देकर सुमार्ग में लावें ॥५॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

जुहुराणा चित् मन्येथाम्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वषण्वसू) = सुखवर्षक वसुओं को प्राप्त करानेवाले (अश्विना) = प्राणापानो! आप (जुहुराणा चित्) = शरीर में नस-नाड़ियों में टेढ़ी-मेढ़ी [crooked ] गति करते हुए भी (मन्येथाम्) = हमें ज्ञान की वृद्धिवाला करते हो। प्राण ज्ञान प्रकार से विविध नाड़ियों में से क्रुञ्चित गतिवाले होते हैं। ये प्राण शक्ति की ऊर्ध्वगति द्वारा ज्ञानाग्नि के दीपन का कारण बनते हैं। [२] (युवम्) = आप (हि) = ही (रुद्रा) = सब रोगों को दूर भगानेवाले हो। (द्विषः अतिपर्षथः) = द्वेष की भावनाओं से हमें पार करते हो। [हतम्] द्वेष की भावनाओं को आप विनष्ट करते हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणापान शरीर नाड़ीचक्र में टेढ़ी-मेढ़ी गति से घूमते हुए भी हमारी ज्ञान वृद्धि का कारण बनते हैं और द्वेष की भावनाओं को विनष्ट करते हैं।
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शिव शंकर शर्मा

पुनस्तत्कर्माह।

पदार्थान्वयभाषाः - हे वृषण्वसू ! अश्विनौ ! जुहुराणा+चित्=कुटिलानपि पुरुषान्। मन्येथाम्=वित्तम्। ततः। रुद्रा=रुद्रौ=भयङ्करौ। युवम्=युवाम्। हि। द्विषः=द्वेषिणः। अति+पर्षथः=अतीत्य संक्लेशयतम्। पृषु हिंसासंक्लेशनयोः ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - And Ashvins, harbingers of generous showers of prosperity, know, examine, understand and fix the crooked antisocial elements. You are the Rudras, agents of justice and award. Cleanse the jealous and punish the enemies.