पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वाजिनीवसू) = शक्तिरूप धनोंवाले प्राणापानो! (ता वाम्) = उन आपको (अद्य) = आज (हव्येभिः) = हव्य पदार्थों के साथ (हवामहे =) हम पुकारते हैं । प्राणसाधना के साथ हव्य पदार्थों का सेवन आवश्यक है। आराधित प्राणापान हमारे लिये शक्तिरूप धनों को प्राप्त कराते हैं । [२] उन आपको हम पुकारते हैं, जो आप (अतिक्षप:) = [ क्षपायाः अति क्रमे] अज्ञान रात्रि के समाप्त होने पर (पूर्वी:) = हमारा पालन व पूरण करनेवाली (इषः) = प्रभु प्रेरणाओं को (इषयन्तौ) = हमारे लिये प्रेरित करते हो, प्राणसाधना से अज्ञानान्धकार का विनाश होता है। हृदयस्थ प्रभु की प्रेरणायें सुनाई पड़ती हैं। ये प्रेरणायें हमारा पालन व पूरण करती हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना के साथ यज्ञिय सात्त्विक आहार का ही सेवन करना चाहिये। ये प्राणापान अज्ञानान्धकार का ध्वंस करके हमें प्रभु प्रेरणा के सुनने के योग्य बनाते हैं, ये प्रेरणायें ही हमारा पालन व पूरण करती हैं।