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वै॒य॒श्वस्य॑ श्रुतं नरो॒तो मे॑ अ॒स्य वे॑दथः । स॒जोष॑सा॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vaiyaśvasya śrutaṁ naroto me asya vedathaḥ | sajoṣasā varuṇo mitro aryamā ||

पद पाठ

वै॒य॒श्वस्य॑ । श्रु॒त॒म् । न॒रा॒ । उ॒तो इति॑ । मे॒ । अ॒स्य । वे॒द॒थः॒ । स॒ऽजोष॑सा । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒र्य॒मा ॥ ८.२६.११

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:26» मन्त्र:11 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:28» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:11


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शिव शंकर शर्मा

पुनः वही विषय आ रहा है।

पदार्थान्वयभाषाः - (नरा) हे लोकनेता ! राजा तथा मन्त्रिदल (उतो) और भी आप सब (वैयश्वस्य) जितेन्द्रिय ऋषियों के समान (अस्य+मे) इस मेरे आह्वान को (श्रुतम्) सुनें (वेदथः) जानें तथा (सजोषसा) मिलकर (वरुणः) राजप्रतिनिधि (मित्रः) ब्राह्मणप्रतिनिधि ये दोनों और (अर्यमा) वैश्यप्रतिनिधि, ये सब मिलकर मेरी सुनें ॥११॥
भावार्थभाषाः - प्रजागण अपनी इच्छा स्वतन्त्रता से सब प्रतिनिधियों के समक्ष सुनावें। प्रतिनिधि दल उस पर यथोचित कार्य्य करें ॥११॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

स्नेह-निर्देषता व संयम

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (नरा) = हमें उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! (वैयश्वस्य) = व्यश्व पुत्र, अर्थात् अत्यन्त विशिष्ट इन्द्रियाश्वोंवाले मे मेरी प्रार्थना को (श्रुतम्) = आप सुनो। (उत) = और (उ) = निश्चय से (मे अस्य वेदथः) = मेरी इस प्रकार को (वेदथः) = आप जानो। अर्थात् मेरी आराधना व्यर्थ न जाये । आपकी इस आराधना से ही मैं अपने इन्द्रियाश्वों को विषयों से अनाक्रान्त व पवित्र बना पाऊँगा। [२] आपकी आराधना से ही मेरे जीवन में (मित्र: वरुणः) = स्नेह व निर्देषता के भाव (सजोषसा) = प्रीतिपूर्वक संगत हों। आपकी आराधना से ही अर्यमा [अदीन् यच्छति] काम-क्रोध- लोभ का संयम मुझे प्राप्त हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना से मेरे जीवन में 'स्नेह, निद्वेषता व संयम' के दिव्यभावों का वास होता है।
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शिव शंकर शर्मा

पुनस्तदनुवर्तते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे नरा=नेतारौ लोकानाम्। उतो=अपि च। युवाम्। वैयश्वस्य=जितेन्द्रियस्य। अस्य। मे=मम। श्रुतम्=शृणुतमाह्वानम्। वेदथश्च=जानीथश्च। तथा। सजोषसा=संगतौ। वरुणः=राजप्रतिनिधिः। मित्रः=ब्राह्मणप्रतिनिधिः। अर्य्यमा=वैश्यप्रतिनिधिः। एतेऽपि। ममाह्वानम्। शृण्वन्तु ॥११॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O leaders of the nation, listen to the song of the holy sage and acknowledge and respond to this song of mine. O Varuna, Kshatriya dispenser of justice, Mitra, loving and friendly Brahmana, and Aryama, Vaishya producer and distributor pursuing the path of rectitude, all together in unison and cooperation, listen to me.