वांछित मन्त्र चुनें

अ॒श्विना॒ स्वृ॑षे स्तुहि कु॒वित्ते॒ श्रव॑तो॒ हव॑म् । नेदी॑यसः कूळयातः प॒णीँरु॒त ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

aśvinā sv ṛṣe stuhi kuvit te śravato havam | nedīyasaḥ kūḻayātaḥ paṇīm̐r uta ||

पद पाठ

अ॒श्विना॑ । सु । ऋ॒षे॒ । स्तु॒हि॒ । कु॒वित् । ते॒ । श्रव॑तः । हव॑म् । नेदी॑यसः । कू॒ळ॒या॒तः॒ । प॒णीन् । उ॒त ॥ ८.२६.१०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:26» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:27» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:10


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पुनः उसी को कहते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (ऋषे) हे ऋषे ! आप (अश्विना+सु+स्तुहि) राजा और मन्त्रिदलों के गुणों को अच्छे प्रकार प्रकाशित कीजिये (ते) तेरी (कुवित्+हवम्) प्रार्थना को अनेक बार (श्रवतः) सुनेंगे (उत) और (नेदीयसः+पणीन्) समीपी कुटिलगामी पुरुषों को (कूलयातः) दण्ड देकर दूर करेंगे ॥१०॥
भावार्थभाषाः - कूलयातः−“कुडि दाहे”। दाहार्थक कुण्ड धातु से बनता है। पणि=जिसका व्यवहार अच्छा नहीं। वाणिज्य आदि व्यवहार में कुटिल पुरुषों को दण्ड देना भी राज्य का काम है ॥१०॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

श्रवतो हवम्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (ऋषे तत्त्वद्रष्टः) = पुरुष ! तू (अश्विना) = प्राणापान को (सुस्तुहि) = सम्यक् स्तुत कर । ये प्राणापान (ते) = तेरी (हवम्) = पुकार को (कुवित्) = खूब ही (श्रवतः) = सुनते हैं। हमारी कामनाओं को प्राणापान ही तो पूर्ण करते हैं। [२] ये प्राणापान (नेदीयसः) = अपने अन्तिकतम उपासकों को (उत) = और (पणीन्) = सब व्यवहारों को प्रभु-स्तवन पूर्वक करनेवालों को (कूळयातः) = सुरक्षित करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - जीवन में यह प्राणसाधना सब कामनाओं को पूर्ण करनेवाली है। यह अपने अन्तिकतम उपासकों को सुरक्षित करती है।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पुनस्तमर्थमाह।

पदार्थान्वयभाषाः - हे ऋषे ! त्वम्। अश्विना=अश्विनौ। सुष्टुहि। ते=तव। कुवित्=बहुवारम्। हवम्=आह्वानम्। श्रवतः=शृणुतः। उत=अपि च। नेदीयसः=समीपस्थान्। पणीन्। कूलयातः=विनाशयतः ॥१०॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O sage, celebrate the Ashvins in profuse numbers, they would listen to your eulogy, come closest and punish and eliminate the niggards and evaders of yajnic homage.