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परि॒ यो र॒श्मिना॑ दि॒वोऽन्ता॑न्म॒मे पृ॑थि॒व्याः । उ॒भे आ प॑प्रौ॒ रोद॑सी महि॒त्वा ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pari yo raśminā divo ntān mame pṛthivyāḥ | ubhe ā paprau rodasī mahitvā ||

पद पाठ

परि॑ । यः । र॒श्मिना॑ । दि॒वः । अन्ता॑न् । म॒मे । पृ॒थि॒व्याः । उ॒भे इति॑ । आ । प॒प्रौ॒ । रोद॑सी॒ इति॑ । म॒हि॒त्वा ॥ ८.२५.१८

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:25» मन्त्र:18 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:24» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:18


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शिव शंकर शर्मा

ब्राह्मणों के गुण दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (यः) जो ब्राह्मण (दिवः+पृथिव्या+अन्तान्) द्युलोक और पृथिवी के अन्तिम सीमा को (रश्मिना) विज्ञान तेज से (परिममे) नापते हैं और (महित्वा) ज्ञान की महिमा से (उभे+रोदसी) दोनों पृथिवी और द्युलोक को ज्ञान और कर्म से (आपप्रौ) पूर्ण करते हैं ॥१८॥
भावार्थभाषाः - वही ब्राह्मण है, जो निज विज्ञान से संसार का परोपकार कर रहा है ॥१८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभु की महिमा का सर्वत्र दर्शन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (य:) = जो प्रभु हैं, वे (दिवः) = द्युलोक के तथा (पृथिव्याः) = पृथिवीलोक के (अन्तान्) = अन्तों को (रश्मिना) = अपने तेज से (परिममे) = [परिमिनोति] मापते हैं, अपने प्रकाश से द्युलोक व पृथिवी- लोक के अन्तों को अवभासित करते हैं। [२] वे प्रभु (उभे रोदसी) = दोनों द्यावापृथिवी को (महित्वा) = अपनी महिमा से आपप्रौ पूरित करते हैं। इन द्यावापृथिवी में सर्वत्र प्रभु की महिमा का प्रकाश हो रहा है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु द्युलोक, पृथिवीलोक को अपने प्रकाश से प्रकाशित कर रहे हैं। इन लोकों में सर्वत्र प्रभु की महिमा का प्रकाश हो रहा है।
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शिव शंकर शर्मा

ब्राह्मणगुणान् दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - यो मित्रो ब्राह्मणः। दिवः=द्युलोकस्य। पृथिव्याश्च। अन्तान्=सीम्नः। रश्मिना=विज्ञानतेजसा। परिममे= परिमिनोति। पुनः। महित्वा=ज्ञानस्य महत्त्वेन। यः। उभे+रोदसी=उभौ लोकौ। आपप्रौ=आप्राति=प्रपूरयति ज्ञानेन कर्मणा च ॥१८॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Mitra, Brahmana, is the brilliant scholar who, like the sun, with his vision reaches and measures the bounds of heaven and earth and with his knowledge and grandeur traverses both earth and heaven.