वांछित मन्त्र चुनें

अ॒यमेक॑ इ॒त्था पु॒रूरु च॑ष्टे॒ वि वि॒श्पति॑: । तस्य॑ व्र॒तान्यनु॑ वश्चरामसि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ayam eka itthā purūru caṣṭe vi viśpatiḥ | tasya vratāny anu vaś carāmasi ||

पद पाठ

अ॒यम् । एकः॑ । इ॒त्था । पु॒रु । उ॒रु । च॒ष्टे॒ । वि । वि॒श्पतिः॑ । तस्य॑ । व्र॒तानि॑ । अनु॑ । वः॒ । च॒रा॒म॒सि॒ ॥ ८.२५.१६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:25» मन्त्र:16 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:24» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:16


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

क्षत्रिय को कैसा होना चाहिये, यह दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - वे वरुण (विश्पतिः) सम्पूर्ण जनों के अधिपति और (एक+एव) एक ही (बहु+उरु+च) बहुत और विस्तृत धनों को (इत्था+विचष्टे) इस प्रकार देखते हैं (तस्य+व्रतानि) उनके नियमों को (वः) आप लोग और हम सब (अनुचरामसि) पालन करें ॥१६॥
भावार्थभाषाः - राज्य की ओर से स्थापित नियमों को सब ही एकमत होकर पालें और पलवावें ॥१६॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

विश्पतिः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अयम्) = यह प्रभु (एकः) = अकेला ही (इत्था) = सचमुच (पुरू) = [पुरूणि] बहुत (उरु) = [उरूणि] विशाल लोकों को (विचष्टे) = विशेषरूप से प्रकाशित करता है। (विश्पतिः) = वही सब प्रजाओं का स्वामी है, वही सब का रक्षक है। [२] (तस्य व्रतानि) = उस प्रभु के व्रतों के (अनु चरामसि) = अनुकूल आचरण करते हैं। (वः) = तुम सब के हित के लिये प्रभु के व्रतों का हम पालन करते हैं। 'सबका पालन करना, व सब का रक्षण' ही प्रभु का सर्वमहान् व्रत है। इस व्रत का पालन ही प्रभु प्राप्ति का उपाय है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु अकेले ही सब विशाल लोकों का प्रकाशन कर रहे हैं। प्रभु ही सब प्रजाओं के रक्षक हैं। हम भी प्रभु के व्रतों का अनुचरण करते हुए सर्वहित में प्रवृत्त होते हैं।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

कीदृशेन क्षत्रियेण भाव्यमिति दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - विश्पतिः=विशां जनानां पतिः। अयं वरुणः। एक एव। पुरु=बहु। उरु च। धनम्। इत्था=इत्थम्। विचष्टे=विपश्यति। हे मनुष्याः ! वः=युष्माकं कल्याणाय। तस्य व्रतानि। वयम्। अनुचरामसि=अनुचरामः ॥१६॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O people of the world, this one Integrity of the two, Mitra and Varuna, lord ruler and promoter of the people, thus watches the vast and various wealths of the world for protection, and for your sake we observe and follow his rules and laws of discipline.