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आ त्वा॒ गोभि॑रिव व्र॒जं गी॒र्भिॠ॑णोम्यद्रिवः । आ स्मा॒ कामं॑ जरि॒तुरा मन॑: पृण ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā tvā gobhir iva vrajaṁ gīrbhir ṛṇomy adrivaḥ | ā smā kāmaṁ jaritur ā manaḥ pṛṇa ||

पद पाठ

आ । त्वा॒ । गोभिः॑ऽइव । व्र॒जम् । गीः॒ऽभिः । ऋ॒णो॒मि॒ । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । आ । स्म॒ । काम॑म् । ज॒रि॒तुः । आ । मनः॑ । पृ॒ण॒ ॥ ८.२४.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:24» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:16» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:6


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शिव शंकर शर्मा

पुनः वही विषय आ रहा है।

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र (अद्रिवः) हे संसाररक्षक देव ! (गोभिः+इव+व्रजम्) जैसे गोपाल गौओं के साथ गोष्ठ में पहुँचता है, तद्वत् मैं (गीर्भिः) स्तुतियों के साथ (त्वा+आ+ऋणोमि) तेरे निकट पहुँचता हूँ। ईश (जरितुः) मुझ स्तुतिपाठक के (कामम्) कामनाओं को (आ+पृण+स्म) पूर्ण ही कर (आ) और (मनः) मन को भी पूर्ण कर ॥६॥
भावार्थभाषाः - मन की गति और चेष्टा अनन्त है, अतः इसको भी वही पूर्ण कर सकता है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'कामं मनः' आपण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अद्रिवः) = आदरणीय प्रभो ! मैं (त्वा) = आपको (गीर्भिः) = ज्ञान की वाणियों के द्वारा (ऋणोमि) = सर्वथा प्राप्त होता हूँ। उसी प्रकार प्राप्त होता हूँ, (इव) = जैसे एक ग्वाला (गोभिः) = गौव के साथ (व्रजम्) = एक गौओं के बाड़े को प्राप्त होता है। मैं भी सब इन्द्रियरूप गौवों को नियन्त्रित करके आपके समीप प्राप्त होता हूँ। [२] हे प्रभो! आप (जरितुः) = स्तोता की (कामम्) = अभिलाषा को (आपूण) = पूर्ण करिये तथा (मनः) = इसके मन को (स्म) = अवश्य आपण पूरण करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम स्तुति वाणियों से प्रभु की ओर जानेवाले हों । प्रभु हमारी कामनाओं को पूर्ण करेंगे और हमारे मनों की न्यूनताओं को दूर करके उनका पूरण करेंगे।
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शिव शंकर शर्मा

पुनस्तदनुवर्तते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! गोभिरिव व्रजम्=यथा गोपालो गोभिः सह गोष्ठं गच्छति तद्वत्। हे अद्रिवः=हे संसाररक्षक ! गीर्भिः=स्तुतिभिः सह। त्वा। आ। ऋणोमि=प्राप्नोमि। हे ईश ! जरितुः=स्तुतिपाठकस्य मम। कामम्। मनश्च। आपृण स्म=आपूरयैव ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of clouds and mountains, wielder of the thunderbolt, like a cowherd reaching the stalls along with the cows do I come to you with my songs of adoration. O lord, fulfil the desire and prayer of the celebrant and bless my mind with peace and divine love.