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तमु॑ त्वा नू॒नमी॑महे॒ नव्यं॑ दंसिष्ठ॒ सन्य॑से । स त्वं नो॒ विश्वा॑ अ॒भिमा॑तीः स॒क्षणि॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tam u tvā nūnam īmahe navyaṁ daṁsiṣṭha sanyase | sa tvaṁ no viśvā abhimātīḥ sakṣaṇiḥ ||

पद पाठ

तम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । नू॒नम् । ई॒म॒हे॒ । नव्य॑म् । दं॒सि॒ष्ठ॒ । सन्य॑से । सः । त्वम् । नः॒ । विश्वाः॑ । अ॒भिऽमा॑तीः । स॒क्षणिः॑ ॥ ८.२४.२६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:24» मन्त्र:26 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:20» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:26


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शिव शंकर शर्मा

पुनः वही विषय आ रहा है।

पदार्थान्वयभाषाः - (दंसिष्ठ) हे अद्भुत कर्मकारी ! हे परमदर्शनीय ! (संन्यसे) संन्यास अर्थात् त्याग के लिये भी (नव्यम्) स्तुत्य (तम्+उ+त्वा) उस तुझसे ही (नूनम्) निश्चय (ईमहे) याचना करते हैं। (सः+त्वम्) वह तू (नः) हमारी (विश्वाः) सब (अभिमातीः) विघ्न सेनाओं का (सक्षणिः) विनाशक हो ॥२६॥
भावार्थभाषाः - “संन्यसे” इसका तात्पर्य यह है कि हम जो कुछ प्राप्त करें, उसमें से अपने योग्य रख करके अन्य सब दान कर दिया जाए और काम क्रोधादि जो महाशत्रु हैं, उनको भी जीतने के लिये सदा प्रयत्न करता रहे ॥२६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अभिमान विजय

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (नव्य) = स्तुत्य (दंसिष्ठ) = शत्रुओं का उपक्षय करनेवाले प्रभो ! (तं त्वा उ नूनम्) = उन आपको ही निश्चय से संन्यसे सब कामनाओं के त्याग के लिये (ईमहे) = याचना करते हैं । [२] (सः) = वे (त्वम्) = आप ही (नः) = हमारे (विश्वाः) = सब (अभिमाती:) = शत्रुओं को, अभिमान आदि आसुरभावों को (सक्षणि:) = पराभूत करनेवाले हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु उपासक की कामनाओं व अभिमान आदि आसुर भावों का विनाश करते हैं।
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शिव शंकर शर्मा

पुनस्तदनुवर्तते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे दंसिष्ठ=अद्भुतकर्मकारिन् ! संन्यसे=संन्यासार्थम्=त्यागाय। असु क्षेपणे। भावे क्विप्। नव्यम्=स्तुत्यम्। तमु+त्वा=तमेव त्वाम्। नूनमीमहे=याचामहे। स त्वम्। नोऽस्माकम्। विश्वाः=सर्वाः। अभिमातीः=विघ्नसेनाः। सक्षणिः= अभिभवशीलो भव। तासां विनाशको भवेत्यर्थः ॥२६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of highest beauty and sublimity, for our acquisitions as well as for our freedom from acquisition we worship you only, the same lord of protection and defence, ever new though constant and eternal. You as the same lord are our friend and protector, and the destroyer of all our enemies of the world.