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अ॒यं यथा॑ न आ॒भुव॒त्त्वष्टा॑ रू॒पेव॒ तक्ष्या॑ । अ॒स्य क्रत्वा॒ यश॑स्वतः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ayaṁ yathā na ābhuvat tvaṣṭā rūpeva takṣyā | asya kratvā yaśasvataḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒यम् । यथा॑ । नः॒ । आ॒ऽभुव॑त् । त्वष्टा॑ । रू॒पाऽइ॑व । तक्ष्या॑ । अ॒स्य । क्रत्वा॑ । यश॑स्वतः ॥ ८.१०२.८

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:102» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:10» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:8


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अस्य क्रत्वा यशस्वतः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अयम्) = यह प्रभु (नः) = हमें (यथा) = ठीक-ठीक इस प्रकार (आभुवत्) = बनाता है (इव) = जैसे (त्वष्टा) = बढ़ई (तक्ष्या) = तक्षणीय - ढीलढाल कर बनाने योग्य (रूपा) = रूपवान् पदार्थों को बनाता है। [२] हम (अस्य) = इस प्रभु के (क्रत्वा) = शक्ति व प्रज्ञान से ही (यशस्वतः) = अतिशयेन यशस्वी बन पाते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण कर दें, प्रभु हमारा ठीक-ठीक निर्माण करेंगे, उस समय प्रभु की शक्ति व प्रज्ञान को प्राप्त करके हम यशस्वी जीवनवाले होंगे।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Just as the artist creates all possible forms out of his plastic materials, giving them beauty, power and purposeful meaning, so does this Agni, universal artist, work on us, for us, and brings out our potentials and gives us forms of beauty, power and excellence as a family, community and common humanity for a purpose, a meaning and a direction. His actions are great, gracious and glorious.