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अ॒यम॑स्मि जरित॒: पश्य॑ मे॒ह विश्वा॑ जा॒तान्य॒भ्य॑स्मि म॒ह्ना । ऋ॒तस्य॑ मा प्र॒दिशो॑ वर्धयन्त्यादर्दि॒रो भुव॑ना दर्दरीमि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ayam asmi jaritaḥ paśya meha viśvā jātāny abhy asmi mahnā | ṛtasya mā pradiśo vardhayanty ādardiro bhuvanā dardarīmi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒यम् । अ॒स्ति॒ । ज॒रि॒त॒रिति॑ । पश्य॑ । मा॒ । इ॒ह । विश्वा॑ । जा॒तानि॑ । अ॒भि । अ॒स्मि॒ । म॒ह्ना । ऋ॒तस्य॑ । मा॒ । प्र॒ऽदिशः॑ । व॒र्ध॒य॒न्ति॒ । आ॒ऽद॒र्दि॒रः । भुव॑ना । द॒र्द॒री॒मि॒ ॥ ८.१००.४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:100» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:4» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:4


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'आदर्दिरः '

पदार्थान्वयभाषाः - [१] प्रभु सत्ता के विषय में संदिग्ध स्तोता से प्रभु कहते हैं कि हे (जरितः) = स्तोतः ! (अयं अस्मि) = मैं तो ये तेरे सामने ही हूँ, (मा) = मुझे (इह) = यहाँ पश्य देख । इस जगत् के प्रत्येक पदार्थ में तुझे मेरी सत्ता दिखेगी। (विश्वा जातानि) = सब उत्पन्न पदार्थों को (मह्ना) = अपनी महिमा से (अभ्यस्मि) = अभिभूत करनेवाला हूँ। [२] (ऋतस्य प्रदिशः) = सत्य के उपदेष्टा लोग (मा वर्धयन्ति) = मेरा वर्धन करते हैं। सत्य ज्ञान को प्राप्त करनेवाले ज्ञानी प्रभु की महिमा को देखते हुए उसका सब के लिये प्रतिपादन करते हैं। प्रभु कहते हैं कि मैं (आदर्दिरः) = समन्तात् सब लोकों का विदारण करनेवाला हूँ। प्रलय के समय मैं ही (भुवना) = सब भुवनों को (दर्दरीमि) = विदीर्ण करता हूँ। वर्तमान में भी उपासकों के शत्रुओं का मैं ही विदारण [विनाश] करता हूँ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - ज्ञान के होने पर सब पदार्थों में प्रभु की महिमा दिखती है। पदार्थों के प्रलय में किसी अनन्त शक्ति का हाथ दिखता ही है। वासनारूप शत्रुओं का भी तो हमारे लिये विदारण बड़ा कठिन होता है। इनका विदारण करनेवाली शक्ति वे प्रभु ही हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - I AM. O celebrant, behold I am here. I am the real on top of all that is bom in the world, self-existent by my own grandeur. The laws of existence exalt me with space, and scholars of the laws, Rtam, adore me all round. I am the creator, I am the destroyer, I split open the seed, I manifest the world forms and I break them back beyond the form into the seed state.