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इन्द्रा॑ग्नी॒ अव॒सा ग॑तम॒स्मभ्यं॑ चर्षणीसहा । मा नो॑ दु॒:शंस॑ ईशत ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

indrāgnī avasā gatam asmabhyaṁ carṣaṇīsahā | mā no duḥśaṁsa īśata ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । अव॑सा । आ । ग॒त॒म् । अ॒स्मभ्य॑म् । च॒र्ष॒णि॒ऽस॒हा॒ । मा । नः॒ । दुः॒ऽशंसः॑ । ई॒श॒त॒ ॥ ७.९४.७

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ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:94» मन्त्र:7 | अष्टक:5» अध्याय:6» वर्ग:18» मन्त्र:1 | मण्डल:7» अनुवाक:6» मन्त्र:7


आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (चर्षणीसहा) हे दुष्टों के दमन करनेवाले (इन्द्राग्नी) कर्मयोगी ज्ञानयोगी विद्वानों ! आप (अवसा) ऐश्वर्य्य के साथ (आगतं) हमारे यज्ञों में आवें और हमारे (दुःशंसः) शत्रु (नः) हमको (मा, ईशत) न सतावें ॥७॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा उपदेश करते हैं कि याज्ञिक लोगो ! तुम अपने यज्ञों में ऐसे विद्वानों को बुलाओ, जो दुष्टों के दमन करने और ऐश्वर्य्य के उत्पन्न करने में समर्थ हों ॥७॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

जागरूक राजा

पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ- हे (चर्षणी) = सहा मनुष्यों के बीच शत्रुओं को हरानेवाले (इन्द्राग्नी) = सूर्य और अग्नि के तुल्य नायको! आप (अस्मभ्यं) - हमारी (अवसा) = रक्षा के सहित (आ गतम्) = आओ। जिससे (नः) = हम पर (दुःशंस:) = दुष्ट वचन बोलनेवाला, पुरुष (मा ईशत) = अधिकार न करे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- राजा का कर्त्तव्य है कि राष्ट्र में जागरूक रहे, यदि शत्रु राष्ट्र सीमावर्ती प्रजाओं को धमकावे या उनकी बस्तियों पर अधिकार करने का प्रयास करे तो तुरन्त उसको प्रत्युत्तर देकर पराजित करे।

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (चर्षणीसहा) हे दुष्टनाशकाः (इन्द्राग्नी) कर्मयोगिनो ज्ञानयोगिनश्च विद्वांसः ! भवन्तः (अवसा) सहैश्वर्येण (आगतम्) आयान्तु, (दुःशंसः) दुष्टाः (नः) अस्माकम् (मा, ईशत) अभिभवितारो न स्युः ॥७॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lords of light and action, Indra and Agni, leaders of the people with patience and spirit of challenge, destroyers of hostilities, come to us with protection, guidance and the prize of victory. Let no evil, no malicious or disreputable forces rule over us.