उ॒क्थेभि॑र्वृत्र॒हन्त॑मा॒ या म॑न्दा॒ना चि॒दा गि॒रा । आ॒ङ्गू॒षैरा॒विवा॑सतः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ukthebhir vṛtrahantamā yā mandānā cid ā girā | āṅgūṣair āvivāsataḥ ||
पद पाठ
उ॒क्थेभिः॑ । वृ॒त्र॒ऽहन्त॑मा । या । म॒न्दा॒ना । चि॒त् । आ । गि॒रा । आ॒ङ्गू॒षैः । आ॒ऽविवा॑सतः ॥ ७.९४.११
ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:94» मन्त्र:11
| अष्टक:5» अध्याय:6» वर्ग:18» मन्त्र:5
| मण्डल:7» अनुवाक:6» मन्त्र:11
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (वृत्रहन्तमा) हे अज्ञान के नाश करनेवाले कर्म्मयोगी तथा ज्ञानयोगी विद्वानों ! आप (उक्थेभिः) परमात्मस्तुतिविधायक वेदमन्त्रों द्वारा (मन्दाना) प्रसन्न होते हुए (चिदा) अथवा (गिरा) आपके आह्वानविधायक वाणियों से (आङ्गूषैः) जो उच्चस्वर से पढ़ी गई हैं, (आविवासतः) उनसे आकर ज्ञानयज्ञ तथा कर्म्मयज्ञ को अवश्यमेव विभूषित करें ॥११॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में कर्मयोगी और ज्ञानयोगियों से अज्ञान के नाश करने की प्रार्थना का विधान है ॥११॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
शिक्षा व्यवस्था
पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ- (या) = जो आप दोनों (वृत्रहन्तमा) = दुष्टों को खूब दण्ड देनेवाले, (उक्थेभिः) = उत्तम वेद-वचनों से (आमन्दाना) = सबको प्रसन्न करते हैं, वे (गिरा चित्) = वेद वाणी से और (आंगूषै) = उत्तम स्तुति - वचनों, उपदेशों से (आ विवासतः) = ज्ञानप्रकाश करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- राजा अपनी प्रजाओं के लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था करे। विद्वानों की नियुक्ति कर वेदवाणी तथा उत्तम ज्ञानोपदेशों के द्वारा विद्या के प्रचार की व्यवस्था करे।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (वृत्रहन्तमा) हे अज्ञाननाशकौ ज्ञानकर्मयोगिनौ ! (उक्थेभिः) परमात्मस्तुतिपरकैर्वेदमन्त्रैः (मन्दाना) प्रसीदन्तः (चिदा) अथवा (गिरा) भवदाह्वानप्रयोज्यवाग्भिः (आङ्गूषैः) तारमुच्चार्यमाणाभिः (आविवासतः) समेत्य ज्ञानकर्मयज्ञं विभूषयताम् ॥११॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O greatest destroyers of evil and darkness, when with the holy chant of Vedic hymns and songs of adoration in words of faith and sincerity you are invoked and invited, then come rejoicing and enlighten the yajna with grace.
