वांछित मन्त्र चुनें

यो वां॒ रथो॑ नृपती॒ अस्ति॑ वो॒ळ्हा त्रि॑वन्धु॒रो वसु॑माँ उ॒स्रया॑मा । आ न॑ ए॒ना ना॑स॒त्योप॑ यातम॒भि यद्वां॑ वि॒श्वप्स्न्यो॒ जिगा॑ति ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yo vāṁ ratho nṛpatī asti voḻhā trivandhuro vasumām̐ usrayāmā | ā na enā nāsatyopa yātam abhi yad vāṁ viśvapsnyo jigāti ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यः । वा॒म् । रथः॑ । नृ॒प॒ती॒ इति॑ नृऽपती । अस्ति॑ । वो॒ळ्हा । त्रि॒ऽव॒न्धु॒रः । वसु॑ऽमान् । उ॒स्रऽया॑मा । आ । नः॒ । ए॒ना । ना॒स॒त्या॒ । उप॑ । या॒त॒म् । अ॒भि । यत् । वा॒म् । वि॒श्वऽप्स्न्यः॑ । जिगा॑ति ॥ ७.७१.४

ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:71» मन्त्र:4 | अष्टक:5» अध्याय:5» वर्ग:18» मन्त्र:4 | मण्डल:7» अनुवाक:5» मन्त्र:4


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे सत्यवादी विद्वानों ! (वां) आप (नः) हमको (एना) उस मार्ग द्वारा (उपयातं) प्राप्त हों, (यः) जो (विश्वप्स्न्यः) परमात्मा ने (जिगाति) कथन किया है। (नृपती) हे मनुष्यों के पति विद्वानों ! (वां) आपका (यत्) जो (रथः) रथ (वोळ्हा आ) तुम्हें भले प्रकार लानेवाला है, वह (त्रिवन्धुरः) तीन बन्धनोंवाला (वसुमान्) ऐश्वर्य्यवाला और (उस्रयामा) आकाशमार्ग में चलनेवाला (अस्तु) हो ॥४॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में यह प्रार्थना की गई है कि हे विद्वज्जनों ! आप परमात्मा के कथन किये हुए मार्ग द्वारा हमें प्राप्त हों अर्थात् परमात्मा ने उपदेशकों के लिये कर्तव्य कथन किया है, उसका आप पालन करें या यों कहो कि आप हमें परमात्मपरायण करके हमारे जीवन को उच्च बनावें और हमें वेदों का उपदेश सुनावें, जो परमात्मा ने हमारे लिये प्रदान किया है ॥४॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गृहस्थ के कर्त्तव्य

पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ - हे (नृपती) = मनुष्य पति पत्नी! विवाहित स्त्री-पुरुषो! जैसे (रथः वोढा, त्रिवन्धुरः) = रथ मनुष्यों को उठाकर ले जाने से 'वोढा' और तीन दण्डों से बने पीढ़े से युक्त होता है, वैसे ही (यः) = जो पुरुष (वां) = आप दोनों में से (रथः) = रम्यस्वभाव का, वा स्थिर होकर (वोढा) = गृहस्थभार सहनेवाला, (त्रि- वन्धुरः) = तीन ऋणों से बद्ध, (वसुमान्) = ऐश्वर्यवान्, (उस्त्रयामा) = सूर्यवत् तेजस्वी होकर जाने हारा है और (यत् वां) = जो तुम दोनों में से (विश्व-स्न्यः) = विशेष रूपवान् होकर (अधि जिगाति) = प्राप्त होता है, हे (नासत्या) = असत्य धारण न करने हारे स्त्री-पुरुषो ! (एना) = उस व्यक्ति के बल से ही (नः आ उपयातम्) = हमें प्राप्त होओ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - विवाहित स्त्री-पुरुष गृहस्थ में स्थित होकर गृहस्थ के उत्तरदायित्व को निभाते हुए असत्य आचरण से सदैव दूर रहकर ऐश्वर्यशाली बनें।
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (नासत्या) हे सत्यवादिनो विद्वांसः ! (वाम्) यूयं (नः) अस्मान् (एना) एतेन मार्गेण (उपयातम्) प्राप्नुत (यः) यो मार्गः (विश्वप्स्न्यः) परमात्मना (जिगाति) उपगीतोऽस्ति। (नृपती) हे मनुष्याणां पतयो विद्वज्जनाः (वाम्) युष्माकं (यत् रथः) यो रथः युष्माकं (आ) सम्यक् (वोळ्हा) वाहकोऽस्ति सः (त्रिवन्धुरः) बन्धनत्रययुक्तः (वसुमान्) ऐश्वर्य्यवान् (उस्रयामा) नभोगमनशीलश्च (अस्तु) भूयात् ॥४॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, protectors of humanity dedicated to the truth and law of nature and Divinity, may your chariot laden with wealth and wisdom, inbuilt with three-fold bonds of physical, mental and spiritual discipline, going by the light of sun, transport you hither to us. Come by this chariot to us following the paths which the lord of universal vision and eternal wisdom reveals to you.