वांछित मन्त्र चुनें

आ वां॒ रथ॑मव॒मस्यां॒ व्यु॑ष्टौ सुम्ना॒यवो॒ वृष॑णो वर्तयन्तु । स्यूम॑गभस्तिमृत॒युग्भि॒रश्वै॒राश्वि॑ना॒ वसु॑मन्तं वहेथाम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā vāṁ ratham avamasyāṁ vyuṣṭau sumnāyavo vṛṣaṇo vartayantu | syūmagabhastim ṛtayugbhir aśvair āśvinā vasumantaṁ vahethām ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । वा॒म् । रथ॑म् । अ॒व॒मस्या॑म् । विऽउ॑ष्टौ । सु॒म्न॒ऽयवः॑ । वृष॑णः । व॒र्त॒य॒न्तु॒ । स्यूम॑ऽगभस्तिम् । ऋ॒त॒युक्ऽभिः॑ । अश्वैः॑ । आ । अ॒श्वि॒ना॒ । वसु॑ऽमन्तम् । व॒हे॒था॒म् ॥ ७.७१.३

ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:71» मन्त्र:3 | अष्टक:5» अध्याय:5» वर्ग:18» मन्त्र:3 | मण्डल:7» अनुवाक:5» मन्त्र:3


0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे विद्वानों ! आप (ऋतयुग्भिः अश्वैः) दो प्रकार के ज्ञानों से हमको (आ) भले प्रकार (वसुमन्तं वहेथां) ऐश्वर्य्यसम्पन्न करें, ताकि हम (सुम्नावयः) सुखपूर्वक (वृषणः वर्तयन्तु) आनन्द को अनुभव कर सकें (वां रथं) आप अपने रथ=यानों को (अवमस्यां व्युष्टौ) विघ्नरहित मार्गों में चलायें और वह सुन्दर रथ (स्यूमगभस्तिम्) ऐश्वर्य्य की रासोंवाले हों ॥३॥
भावार्थभाषाः - इस मन्त्र में यह प्रार्थना की गई है कि हे परमात्मा ! आप हमारे उपदेशकों को ऐश्वर्य्य की रासोंवाले रथ प्रदान करें अर्थात् वे सब प्रकार से सम्पत्तिसम्पन्न हों, दरिद्र न हों, ताकि वह हमको ऐहलौकिक दोनों प्रकार के सुख का उपदेश करें अर्थात् हम उनसे अभ्युदय तथा निःश्रेयस दोनों प्रकार के ज्ञान प्राप्त करके आनन्द अनुभव कर सकें ॥३॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

आदर्श गृहस्थ

पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ- जैसे रथ को बलवान् अश्व चलाते हैं और (ऋतयुग्भिः अश्वैः स्यूमगभस्तिं, वसुमन्तं रथं वहन्ति) = ज्ञान- पूर्वक लगे अश्वों से, सिली रासोंवाले और धनादि- सम्पन्न रथ को ले जाते हैं वैसे ही हे (अश्विना) = विद्या में व्यापक विद्वान् स्त्री-पुरुषों के स्वामी जनो! (वां) = आप के (रथं) = गृहस्थोचित कर्त्तव्य आदि को (अवमस्यां व्युष्टौ) = आगामी प्रभात वेला में (सुम्नायवः) = सुखाभिलाषी (वृषणः) = बलवान् पुरुष (वर्त्तयन्तु) = सम्पादित करें और आप दोनों (स्यूमगभस्तिम्) = सुखकारी रश्मियों या रासों से युक्त (वसुमन्तं रथं) = बसनेवाले, वा वसु ब्रह्मचारियों वा सुखैश्वर्ययुक्त गृहस्थाश्रम-रूप रथ को (ऋतयुग्भिः) = सत्य से जुड़े हुए, (अश्वैः) = विद्वानों की सहायता से (वहेथाम्) = धारण करो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- गृहस्थ स्त्री पुरुष ज्ञानपूर्वक अपने गृहस्थ के समस्त कार्यों को करें और इस सुखऐश्वर्ययुक्त गृहस्थाश्रम को विद्वानों के मार्गदर्शन में धारण करें।
0 बार पढ़ा गया

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अश्विना) हे विद्वांसः ! भवन्तः (ऋतयुग्भिः अश्वैः) द्विविधैर्ज्ञानैः अस्मान् (आ) सम्यक्तया (वसुमन्तम्) ऐश्वर्य्ययुक्तान् (वहेथाम्) कुर्वन्तु यतो वयं (सुम्नायवः) सुखयुक्ताः सन्तः (वृषणः वर्त्तयन्तु) आनन्दमनुभवाम (वाम्) यूयं (रथम्) स्वकीयं यानं (अवमस्याम् व्युष्टौ) निर्विघ्ने मार्गे सञ्चारयत तथा च तानि यानानि (स्यूमगभस्तिम्) रश्मियुक्तानि बभूवुः ॥३॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - On the rise of the new dawn when darkness is cleared, O devout, generous, gracious and powerful pioneers of light and wisdom, turn and guide your chariot towards us. Ashvins, harbingers of light and joy, steer your chariot laden with wealth, controlled by reins of sun rays and powered by the wise dedicated to the truth of divine laws, come to us and bless all.