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उ॒ग्रं व॒ ओजः॑ स्थि॒रा शवां॒स्यधा॑ म॒रुद्भि॑र्ग॒णस्तुवि॑ष्मान् ॥७॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ugraṁ va ojaḥ sthirā śavāṁsy adhā marudbhir gaṇas tuviṣmān ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

उ॒ग्रम्। वः॒। ओजः॑। स्थि॒रा। शवां॑सि। अध॑। म॒रुत्ऽभिः॑। ग॒णः। तुवि॑ष्मान् ॥७॥

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ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:56» मन्त्र:7 | अष्टक:5» अध्याय:4» वर्ग:23» मन्त्र:7 | मण्डल:7» अनुवाक:4» मन्त्र:7


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर स्त्री कैसे वर्तें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे स्त्रियो ! (वः) तुम्हारा (मरुद्भिः) उत्तम मनुष्यों के साथ (उग्रम्) तेजस्वी (ओजः) पराक्रम और (स्थिरा) स्थिर दृढ़ (शवांसि) बल (अध) इस के अनन्तर (गणः) समूह (तुविष्मान्) बलवान् हो ॥७॥
भावार्थभाषाः - जो स्त्रियाँ अपने पतियों के बल को न क्षीण करातीं, उनका पुत्र-पौत्रादि समूह बलवान् होता है ॥७॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

ओजस्वी वीर

पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ- हे प्रजाजनो ! (वः) = आप लोगों का (ओजः) = तेज (उग्रं) = उन्नत कोटि का और (शवांसि स्थिरा) = बल स्थिर और (मरुद्भिः सह गण:) = बलवान् वीरों, विद्वानों सहित गण (तुविष्मान्) = बलवान् हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- राष्ट्र की सेना पराक्रमी, उग्र तथा स्थिर बलवाली होवे। प्राणशक्ति से युक्त सैनिक बलवान् हों।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनः स्त्रियः कथं वर्तेरन्नित्याह ॥

अन्वय:

हे स्त्रियो ! वो मरुद्भिस्सहोग्रम् ओजः स्थिरा शवांस्यध गणस्तुविष्मान् भवतु ॥७॥

पदार्थान्वयभाषाः - (उग्रम्) तेजस्वी (वः) युष्माकम् (ओजः) पराक्रमः (स्थिरा) स्थिराणि दृढानि (शवांसि) बलानि (अधा) अथ। अत्र निपातस्य चेति दीर्घः। (मरुद्भिः) उत्तमैर्मनुष्यैः (गणः) समूहः (तुविष्मान्) बलवान् ॥७॥
भावार्थभाषाः - या स्त्रियः स्वेषां पतीनां च बलं न ह्रासयन्ति तासां पुत्रपौत्रादिगणो बलवान् जायते ॥७॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Your vigour is bright and passionate, your courage and valour is constant and inviolable, and your republic is strong and invulnerable by virtue of the vibrant warriors.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - ज्या स्त्रिया आपल्या पतीचे बल क्षीण करीत नाहीत त्यांचे पुत्रपौत्रही बलवान असतात. ॥ ७ ॥