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आ ज॑ङ्घन्ति॒ सान्वे॑षां ज॒घनाँ॒ उप॑ जिघ्नते। अश्वा॑जनि॒ प्रचे॑त॒सोऽश्वा॑न्त्स॒मत्सु॑ चोदय ॥१३॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā jaṅghanti sānv eṣāṁ jaghanām̐ upa jighnate | aśvājani pracetaso śvān samatsu codaya ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ। ज॒ङ्घ॒न्ति॒। सानु॑। ए॒षा॒म्। ज॒घना॑न्। उप॑। जि॒घ्न॒ते॒। अश्व॑ऽअजनि। प्रऽचे॑तसः। अश्वा॑न्। स॒मत्ऽसु॑। चो॒द॒य॒ ॥१३॥

ऋग्वेद » मण्डल:6» सूक्त:75» मन्त्र:13 | अष्टक:5» अध्याय:1» वर्ग:21» मन्त्र:3 | मण्डल:6» अनुवाक:6» मन्त्र:13


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर रानी सङ्ग्राम में क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (अश्वाजनि) घोड़ों की पटकी देनेवाली रानी ! तू जो वीरजन (एषाम्) इन शत्रुओं के (सानु) अङ्गों को (आ, जङ्घन्ति) सब ओर से निरन्तर काटते हैं तथा (जघनान्) नीचकर्म करनेवालों को (उप, जिघ्नते) उपस्थित होकर मारते हैं उन (प्रचेतसः) उत्तम विज्ञानवाले (अश्वान्) बड़े बड़े बलवान् शूरवीर पुरुषों को (समत्सु) सङ्ग्रामों में (चोदय) प्रेरो ॥१३॥
भावार्थभाषाः - सङ्ग्राम में राजा के अभाव में रानी सेनापति हो और जैसे राजा युद्ध कराने को वीरों को प्रेरणा दे, वैसे ही वह भी आचरण करे ॥१३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रतोदः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्वाजनि) = [अश्व+अज्] अश्वों को गति देनेवाली व अश्वों पर फेंके जानेवाली कशे [चावुक] (प्रचेतसः) = प्रकृष्ट ज्ञानवाले समझदार सारथि तेरे द्वारा (एषाम्) = इन घोड़ों के (सानु) = सविथ प्रदेशों को [thigh] (आजङ्घन्ति) = आहत करते हैं। (जघनान्) = जघन प्रदेशों को [the hip and the coins] (उपजिघ्नते) = आहत करते हैं। [२] इस प्रकार हे कशे ! तू (अश्वान्) = इन घोड़ों को (समत्सु) = संग्रामों में (चोदय) = प्रेरित कर तेरे से आहत हुए हुए ये घोड़े तीव्रता से आगे बढ़नेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- समझदार सारथि कशा के समुचित प्रयोग से घोड़ों को रणांगण में आगे तीव्रगतिवाला करता है।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुना राज्ञी सङ्ग्रामे किं कुर्य्यादित्याह ॥

अन्वय:

हे अश्वाजनि राज्ञि ! त्वं ये वीरा एषां शत्रूणां सान्वा जङ्घन्ति जघनानुप जिघ्नते तान् प्रचेतसोऽश्वाञ्छूरान् समत्सु चोदय ॥१३॥

पदार्थान्वयभाषाः - (आ) समन्तात् (जङ्घन्ति) भृशं घ्नन्ति (सानु) अवयवान् (एषाम्) (जघनान्) नीचकर्मकारिणः (उप) (जिघ्नते) घ्नन्ति (अश्वाजनि) अश्वानां प्रक्षेप्त्रि (प्रचेतसः) प्रकृष्टं चेतो विज्ञानं येषां तान् (अश्वान्) महतो बलिष्ठान् (समत्सु) सङ्ग्रामेषु (चोदय) प्रेरय ॥१३॥
भावार्थभाषाः - सङ्ग्रामे राजाभावे राज्ञी सेनापतिः स्याद्यथा राजा योधयितुं वीरान् प्रेरयेद्धर्षयेत्तथैव साऽप्याचरेत् ॥१३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O inspirer of the brave like a goad, inspire the wise and brave warriors of the earth who break down the forces of these enemies of humanity and strike down the saboteurs and terrorists in the battles of life.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

What should a queen do in the battle-is told.

अन्वय:

O queen ! you who know how to train horses, urge upon those heroes to fight well in the battles. who sharply whip the organs of these enemies and kill the wicked evil-doers and who are mighty persons endowed with good knowledge.

भावार्थभाषाः - In the absence of the king ! let the queen be the Commander-in- Chief of the army in the battles. As a king should urge, encourage and inspire and gladden the heroes to fight, so she should also do.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - युद्धात राजा नसेल तर राणीने सेनापती व्हावे व जसा राजा युद्ध करण्याची वीरांना प्रेरणा देतो तसेच तिनेही आचरण करावे. ॥ १३ ॥