त्वं दे॑वि सरस्व॒त्यवा॒ वाजे॑षु वाजिनि। रदा॑ पू॒षेव॑ नः स॒निम् ॥६॥
tvaṁ devi sarasvaty avā vājeṣu vājini | radā pūṣeva naḥ sanim ||
त्वम्। दे॒वि॒। स॒र॒स्व॒ति॒। अव॑। वाजे॑षु। वा॒जि॒नि॒। रद॑। पू॒षाऽइ॑व। नः॒। स॒निम् ॥६॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह क्या करती है, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वाज-सनि [शक्ति-धन]
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः सा किं करोतीत्याह ॥
हे देवि वाजिनि सरस्वति ! त्वं नः सनिं वाजेषु पूषेवावा रदा च ॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What does Sarasvati do-is further told.
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