प्र णो॑ दे॒वी सर॑स्वती॒ वाजे॑भिर्वा॒जिनी॑वती। धी॒नाम॑वि॒त्र्य॑वतु ॥४॥
pra ṇo devī sarasvatī vājebhir vājinīvatī | dhīnām avitry avatu ||
प्र। नः॒। दे॒वी। सर॑स्वती। वाजे॑भिः। वा॒जिनी॑ऽवती। धी॒नाम्। अ॒वि॒त्री। अ॒व॒तु॒ ॥४॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह कैसी रक्षा करनेवाली है, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
शक्ति- बुद्धि
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः सा कीदृशी रक्षिकेत्याह ॥
हे सन्ताना ! या देवी वाजेभिर्वाजिनीवती सरस्वती नो धीनामवित्री प्रावतु तां यूयं स्वीकुरुत ॥४॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How is she (speech) a protector-is told.
O children! you should accept that highly learned lady, who is rich with the speech full of true knowledge and who is endowed with admirable and practical scientific knowledge. May she be the protector of our intellects.
