ह॒तो वृ॒त्राण्यार्या॑ ह॒तो दासा॑नि॒ सत्प॑ती। ह॒तो विश्वा॒ अप॒ द्विषः॑ ॥६॥
hato vṛtrāṇy āryā hato dāsāni satpatī | hato viśvā apa dviṣaḥ ||
ह॒तः। वृ॒त्राणि॑। आर्या॑। ह॒तः। दासा॑नि। सत्प॑ती॒ इति॒ सत्ऽप॑ती। ह॒तः। विश्वाः॑। अप॑। द्विषः॑ ॥६॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वे कैसे हैं, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'वृत्र दास तथा द्वेष' का विनाश
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तौ कीदृशावित्याह ॥
हे मनुष्या ! यावार्या सत्पती सूर्य्यविद्युतौ वृत्राणीव विश्वा द्विषोप हतः। दासान्यप हतो दुःखान्यप हतस्तौ सत्कर्त्तव्यौ ॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How are they (King and Prime Minister)-is told.
O men! you should honor those kings and ministers, who being endowed with noble virtues, actions and temperament and protectors of the righteous persons, destroy all malicious enemies like the sun and lightning dissipating the clouds, and destroy all miseries.
